३१ - तीसरा क्यों नहीं?
३२ - ब्रह्म ने सीमित रूप क्यों लिए हैं?
३३ - क्या स्वयं को ब्रह्म कहना दंभ नहीं है?
३४ - ब्रह्म होकर भी मैं जो चाहूँ वो क्यों नहीं कर सकता?
३५ - अद्वैत टूटकर द्वैत कैसे हो गया?
३६ - ब्रह्मावस्था में कैसे रहें?
३७ - अस्तित्व, ब्रह्म, शून्य, अद्वैत, पूर्णता, संभावना - इनमें क्या भेद हैं?
३८ - ब्रह्मज्ञान होने पर क्या करना चाहिए?
३९ - क्या ब्रह्म सत्य है?
४० - अंतिम सत्य