परिभाषा
- उपमान (या उपमा) वह पारंपरिक ज्ञान-साधन है जिसके अंतर्गत किसी अज्ञात वस्तु को समझाने के लिए किसी ज्ञात वस्तु की सादृश्यता, समानता या तुलना का प्रयोग किया जाता है।
- जैसे, जिसे 'शेर' का ज्ञान नहीं है, उसे यह बताना कि 'शेर बिल्ली की तरह होता है, बस आकार में बड़ा होता है', उपमान कहलाता है।
मुख्य शिक्षाएं
- ज्ञानमार्ग पर उपमान को ज्ञान का सर्वमान्य या स्वतंत्र साधन नहीं माना गया है, क्योंकि यह अंततः पूर्व अनुभव और तर्क का ही एक संयुक्त रूप है।
- उपमान केवल व्यावहारिक जगत में या गुरु द्वारा अमूर्त सिद्धांतों को समझाने के लिए दी जाने वाली एक सहायक युक्ति मात्र है। इसे ठोस प्रमाण नहीं माना जा सकता।
- परम सत्य या अनुभवकर्ता को जानने के लिए उपमान पूरी तरह असफल सिद्ध होता है, क्योंकि अनुभवकर्ता के समान कोई दूसरी वस्तु नहीं है जिससे उसकी तुलना की जा सके। वह अद्वितीय है।
- सत्य के निर्धारण के लिए केवल अपरोक्ष अनुभव और ठोस तर्क ही सर्वमान्य साधन हैं।