परिभाषा
- लक्ष्य वह अंतिम ध्येय, गंतव्य या उद्देश्य है जिसके लिए साधक ज्ञानमार्ग पर प्रवृत्त होता है।
मुख्य शिक्षाएं
- सांसारिक और अज्ञानी व्यक्ति केवल क्षणभंगुर उत्तरजीविता और वासनापूर्ति के छोटे-मोटे लक्ष्य बनाता है, जबकि साधक का लक्ष्य इन सभी बंधनों से पार पाना होता है।
- आध्यात्मिक लक्ष्य को प्राप्त करने के तीन क्रमिक चरण हैं: श्रवण, मनन और निदिध्यासन।
- ज्ञानमार्ग के अनुसार, अंतिम लक्ष्य (ब्रह्मज्ञान) की प्राप्ति के बाद मार्ग, साधना और स्वयं 'खोजने वाले' का भी अंत हो जाता है; वहाँ केवल अचल शांति और अज्ञेयता शेष रहती है।
- परम लक्ष्य की प्राप्ति होने पर साधक सहज समाधि की अवस्था में प्रतिष्ठित हो जाता है, जहाँ कोई कर्ता या कर्म का भेद नहीं बचता।