परिभाषा
- शास्त्र (या ग्रंथ) आत्मज्ञानी ऋषियों और गुरुओं द्वारा अपने अनुभवों और तार्किक निष्कर्षों को लिखित रूप में संकलित की गई सूचना या शाब्द प्रणालियाँ हैं।
- ये ज्ञान की ओर केवल संकेत करते हैं, स्वयं ज्ञान नहीं होते।
मुख्य शिक्षाएं
- शास्त्रों (जैसे वेद, उपनिषद, गीता) में संकलित वाक्यों को ज्ञानमार्ग पर ज्ञान का स्वतंत्र या मान्य साधन नहीं माना जाता, क्योंकि वे केवल परोक्ष सूचना देते हैं।
- कलयुग में शास्त्रों के मूल वाक्यों में मनमाने बदलाव होने और अज्ञानियों द्वारा उनकी गलत व्याख्या किए जाने के कारण वे पूरी तरह विश्वसनीय नहीं रहे।
- शास्त्रों का अंधानुकरण करना अज्ञान और अंधविश्वास का कारण है; शास्त्र में लिखी हुई किसी भी बात को अपने स्वयं के अपरोक्ष अनुभव और तर्क की कसौटी पर कसना अनिवार्य है।
- शास्त्र केवल परम सत्य की ओर संकेत करने वाले मील के पत्थर हैं; वे कभी भी स्वयं अनुभव का स्थान नहीं ले सकते।