आध्यात्मिक लक्ष्य


परिभाषा

  • मनुष्य जन्म का चरम लक्ष्य इस नश्वर संसार से सदा के लिए विदा होकर अपने सत्य स्वरूप में अवस्थित होना है।

मुख्य शिक्षाएं

  • सांसारिक लक्ष्यों (जैसे धन-संपत्ति, भोग-विलास या मान-सम्मान) के विपरीत, आध्यात्मिक लक्ष्य पूरी तरह आंतरिक, अपरिवर्तनीय और अविनाशी सुख की प्राप्ति है।
  • ज्ञानमार्ग के अनुसार, अंतिम आध्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति के बाद जानने या करने के लिए कुछ भी शेष नहीं बचता; यहाँ साधक का अहंनाश हो जाता है और केवल अनुभवकर्ता शेष रहता है।
  • इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए साधक में तीव्र जिज्ञासा और मुमुक्षत्व (मुक्ति की तीव्र इच्छा) का होना अनिवार्य है।
  • आध्यात्मिक लक्ष्य की सिद्धि के बाद सभी प्रकार के मार्ग, साधन और साधना समाप्त हो जाते हैं, और साधक सहज समाधि की अवस्था में आ जाता है।

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