नकारात्मक ज्ञान


परिभाषा

  • यह सकारात्मक ज्ञान (गुणों को स्वीकारना) के विपरीत कार्य करता है, क्योंकि अज्ञान अक्सर सकारात्मक ज्ञान के रूप में ही चित्त में पाया जाता है।

मुख्य शिक्षाएं

  • ज्ञानमार्ग मूलतः एक नकारात्मक (ऋणात्मक) मार्ग है; यह साधक को कुछ नया नहीं देता, बल्कि उसके भीतर संचित अज्ञान, मान्यताओं और मतारोपणों का समूल नाश करता है।
  • नेति-नेति (यह भी नहीं, वह भी नहीं) नकारात्मक ज्ञान की प्रमुख पारंपरिक विधि है, जिसके माध्यम से दृश्य जगत की सभी अनित्य और परिवर्तनशील श्रेणियों को नकारा जाता है।
  • अस्तित्व, अनुभवकर्ता (स्वयं) और ब्रह्म का कोई सकारात्मक गुण या भौतिक स्वरूप नहीं बताया जा सकता; इनका वास्तविक बोध केवल नकारात्मक कथनों (जैसे अजन्मा, निराकार, निर्गुण, असीम) द्वारा ही संभव है।
  • सकारात्मक ज्ञान (जैसे 'मैं शरीर हूँ') अज्ञान है, जबकि नकारात्मक ज्ञान (जैसे 'मैं शरीर नहीं हूँ') उस भ्रामक तादात्म्य को तोड़कर सीधे आत्मज्ञान की ओर ले जाता है।

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