परिभाषा
- न्याय दर्शन भारतीय दर्शन की वह प्रमुख आन्वीक्षिकी (तार्किक समीक्षात्मक परीक्षण) शाखा है जो सीधे प्रमाणों के आधार पर किसी निर्णय पर पहुँचने की प्रणाली सिखाती है।
- इसका शाब्दिक अर्थ है- वह साधन जिसके द्वारा हम अपने ज्ञेय तत्व के पास पहुँचते हैं। इसका परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है।
मुख्य शिक्षाएं
- न्याय दर्शन महर्षि गौतम द्वारा रचित न्याय सूत्रों पर आधारित है। इसके मुख्य तीन पहलू हैं: मनोवैज्ञानिक, तार्किक और दार्शनिक।
- यह दर्शन यथार्थ ज्ञान (प्रमा) के चार साधन स्वीकार करता है: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द (शाब्द)।
- ज्ञानमार्ग न्याय दर्शन की गहन तार्किक प्रणालियों और विश्लेषण का भरपूर उपयोग करता है, परंतु सत्य के चरम अन्वेषण के लिए यह केवल दो ही साधनों (अपरोक्ष अनुभव और तर्क) को सर्वमान्य मानता है।
- न्याय दर्शन के अनुसार, अज्ञान और संशयों का नाश करके ही जीव संसार के दुखों से मुक्त होकर परमार्थ को जान सकता है।