परिभाषा
- मीमांसा भारतीय दर्शन की वह प्रमुख आस्तिक शाखा है जो वेदों की संहिताओं, उनके अर्थ और कर्मकांड (यज्ञ, विधि-विधान) की व्याख्या पर केंद्रित है।
- यह दर्शन मुख्यतः वेदों के कर्मकांडीय और कर्म प्रधान पक्ष पर बल देता है।
मुख्य शिक्षाएं
- मीमांसा दर्शन मुख्य रूप से धर्म के व्यावहारिक और वैदिक कर्मकांडीय पक्ष पर बल देता है, जिसका मुख्य उद्देश्य पुण्यार्जन करना और नियमों का पालन करना है।
- ज्ञानमार्ग मीमांसा के इस बाह्य कर्मकांडीय दृष्टिकोण से सर्वथा भिन्न है; क्योंकि ज्ञानमार्ग के अनुसार कर्मकांडों से जीव को कभी परम मुक्ति नहीं मिल सकती, मुक्ति केवल अज्ञान के नाश (ज्ञान) से ही संभव है।
- मीमांसा जहाँ वेदों के शब्द प्रमाण को ही अंतिम सत्य मानती है, वहीं ज्ञानमार्ग केवल अपरोक्ष अनुभव और ठोस तर्क को ही ज्ञान के वैध साधन के रूप में स्वीकार करता है।
- साधक के लिए बाह्य कर्मकांडों और अनुष्ठानों में उलझे रहना एक प्रकार की मानसिक सीमा है, जो आत्म-अन्वेषण के मार्ग में बाधा बनती है।