परिभाषा
- साक्षी (द्रष्टा, अनुभवकर्ता) वह है जो सभी अनुभवों का साक्षी है बिना प्रभावित हुए। यह शुद्ध चेतना है — देखने वाला, कर्ता नहीं।
मुख्य शिक्षाएं
- साक्षी को देखा नहीं जा सकता क्योंकि यह देखने वाला स्वयं है। यह स्वयंप्रकाश है — अपनी ही रोशनी से प्रकाशित।
- सभी अनुभव साक्षी में प्रकट होते हैं, लेकिन साक्षी किसी भी अनुभव से स्पर्श नहीं होता।
- साक्षी भाव (साक्षी का दृष्टिकोण) का अभ्यास ही जागरूकता का अभ्यास है — 'मैं जो कुछ भी हो रहा हूं उसका साक्षी हूं'।
- साक्षी और अनुभवकर्ता एक ही हैं — वे अलग-अलग शब्द एक ही सत्य को इंगित करते हैं।
देखें
- साक्षी
- अनुभवकर्ता
- जागरूकता
- चेतना
- स्व
- द्रष्टा
- साक्षी भाव