परिभाषा
- स्थूल शरीर (या अन्नमय कोष) पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश) से निर्मित वह भौतिक ढांचा है जो ज्ञानेन्द्रियों द्वारा प्रत्यक्ष दिखाई देता है और भोजन (अन्न) द्वारा पोषित होता है।
- यह जागृत अवस्था में बाह्य जगत से संपर्क का मुख्य माध्यम है।
मुख्य शिक्षाएं
- स्थूल शरीर जन्म और मृत्यु के अधीन है — यह वास्तविक अनुभवकर्ता नहीं है, केवल एक नश्वर यंत्र है।
- यह शरीर पूरी तरह से नश्वर, परिवर्तनशील और अनित्य होने के कारण सत्य के मापदंड पर असत्य (मिथ्या) है।
- अज्ञान के कारण जीव स्वयं को स्थूल शरीर मान लेता है और इसकी रक्षा व विलासिता को ही जीवन का एकमात्र उद्देश्य समझ बैठता है, जो कि मूल अज्ञान है।
- नेति-नेति की तार्किक विधि द्वारा सबसे पहले इसी स्थूल शरीर के साथ होने वाले तादात्म्य को नकारा जाता है: 'मैं यह शरीर नहीं हूँ, मैं इसका साक्षी हूँ'।