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मेरा गुरु ही मेरा राम है
स्वप्रकाश
मेरा गुरु ही मेरा राम है, गुरु बिन इस जीव को कहाँ आराम है। मेरा गुरु ही मेरा राम है, गुरु बिन इस जीव को कहाँ आराम है। वह राम ही है, जो मेरा तत्व है। गुरु ही मेरा राम और कृष्ण, मेरा सत्य है।। भूला हुआ था अपने ही सत्य स्वरूप को। गुरु ने आईना दिखा दिया मुझे अज्ञानी जीव को।। गुरु ने हाथ पकड़ कर माया से पार लगाया है। मेरे अँधेरे जीवन को सत्य का प्रकाश दिखाया है।। गुरु स्मरण प्रतिदिन मुझे, साक्षी भाव में लाता है। प्रति पल मुझे मेरे, स्वरूप का स्मरण कराता है।। मेरा गुरु ही मेरा राम है, गुरु बिन इस जीव को कहाँ आराम है। खोया हुआ था, अहम की आघोष में। गुरु ने ज्ञान प्रकाश से, ला दिया होश में।। गुरु को समर्पण ही, मेरी राम भक्ति है। गुरु कृपा से ही, ज्ञान की वृष्टि है।। समस्त मिथ्या छोड़ अब तो, ज्ञान प्रकाश ही जीवन लक्ष्य हुआ। ज्ञानामृत पाकर जीव, सच्चिदानंद हुआ।। राम मय ही अब तो मेरा संपूर्ण जीवन हुआ। गुरु को पाकर ही, अपूर्ण जीव पूर्ण हुआ।। मेरा गुरु ही मेरा राम है, गुरु बिन इस जीव को कहाँ आराम है। गुरु की महिमा बखान करने को, ये जीव असमर्थ है। गुरु बिन जीवन जीना, पूर्णतः व्यर्थ है।। गुरु की महिमा मंडन को शब्द गौण हैं। अंत में सिर्फ शेष रह जाता मौन है।। गुरु भक्ति में रम जाने पर, मैंने तो मेरा राम पाया है। अब तो गुरु प्रेम में ही, इस जीव को आनन्द आया है।। मेरा गुरु ही मेरा राम है, गुरु बिन इस जीव को कहाँ आराम है। हे गुरुदेव है अनंत कोटि नमन तुमको। अपनी शरण में रखना सदा, हम अज्ञानी जन को।। अब तो अश्रु ही, गुरु आभार व्यक्त कर पाते हैं। क्योंकि शब्द तो, बहुत ही छोटे पड़ जाते हैं।। और क्या करूँ, उस असीमित गुरु की व्याख्या। बस गुरु में ही लीन हो जाऊँ, बस यही है अंतिम अभिलाषा।। बस गुरु में ही लीन हो जाऊँ, बस यही है अंतिम अभिलाषा।। मेरा गुरु ही मेरा राम है, गुरु बिन इस जीव को कहां आराम है। <font color="blue">**सभी सुखी हों, सभी समृद्ध हों, सभी ज्ञानवान हों, सभी मुक्त हों ....**</font> <font color="green">**श्री गुरुवे नमः ....ॐ शांति शांति शांति .....**</font> **आभार:** मैं परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री तरुण प्रधान जी एवं गुरुक्षेत्र का उनकी शिक्षाओं एवं मार्गदर्शन के लिए आभारी हूँ। **संपर्क सूत्र..** *साधक की कलम से : स्वप्रकाश.......* *ईमेल: swaprakash.gyan@gmail.com*
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