Wise Words
मुक्त हूं पहले सें
निशिगंधा क्षीरसागर
मुक्त हूं मैं --- पेहले सें यही बंधन मुझ में --- कभी भी नही अज्ञान जाल में --- फस गया सहि अज्ञान माया में -- फसा हूं यदी अज्ञान अविद्या माया -- मुझ में नही कचरा कुडा जमा -- मुझ में नहि मैं आत्मन् हूं -- ज्ञान भी मैं हि माया मिथ्या अज्ञान -- मुझ में नही मैं अनंत असीम -- अंत-सीमा मुझमें नही स्मृती संस्कार -- चिपके मुझें सही मैं स्मृती संस्कार -- अज्ञान आवरण नही कचरे कुडे का -- सारा बंधन यूही अनावश्यक है जमा --- बादल आवरण आंधी बंधन जाल -- स्मृती संस्कार कीं पुंजी छुडवाने कें लिये -- दुःख संकट कीं संधी बंधन सारा -- रिश्ते नातो कीं धुंदी अज्ञान बादल ढकते -- ज्ञान कीं झाँकी मैं सदा सें -- स्वयंप्रकाश आत्मन् ज्ञानी...... II1II मुक्त मैं --- पेहले सें सही कल आज कल -- काल में सभी जनम जनम सें -- जमाया जो जो वही तो बंधन -- बना सो सो हटा दो सारा -- जमा त्यो त्यो शुद्धी यही तो --- बने साधना सारी दान त्याग सें -- आत्मा कीं सफाई आवरण जो हटा -- तेज प्रगती घटी कर्म का यज्ञ -- ज्ञान कीं गती बाकी जो रहा --- कुछ भी नही जन्मबीज जलादे -- ज्ञान कीं अग्नि यही तो मुक्ती -- जीवन सफलता सारी...... II2II मुक्त मैं --- पेहले सें यही बंधन मुझ में --- कभी भी नही बंधन वृत्ती का -- विचार आसक्ती सारी विवेक सें हटाकर -- वैराग्य कीं प्राप्ती विचार और वृत्ती -- कीं स्वच्छता सफाई प्रगती कीं ऊर्ध्व -- दिशा है यही अज्ञान सें सारी -- जीवन यात्रा हुई आवरण अविद्या विलीन -- अज्ञान माया हटी अवकाशस्थित स्वप्रकाशित ब्रह्म-- सदा सें वही मुक्त मैं --- पेहले सें यही बंधन मुझ में --- कभी भी नही ...... II3II संसार लौकिक राजकारण -- सबकुछ बटोर लिया धनं पैसा इज्जत -- शौहरत कमा लिया अज्ञान सें जमाया -- मल अज्ञान बोझा अज्ञान सें बद्धता -- ज्ञान सें बुद्धता ज्ञान सें छूटे -- अहंभाव ममत्व कर्तापना मैंपना छूट गया -- होनामात्र रह गया ज्ञान कीं दृष्टीसें -- भेदभाव द्वैत छूटा बचा होनामात्र द्रष्टापना -- बन गया द्रष्टा बन गया अनुभवकर्ता -- देखें साक्ष कीं दृष्टी संसार में होकर -- संसार सें विरक्ती बद्धता है बंधन -- बुद्धता हि मुक्ती अज्ञानी सें ज्ञानीदृष्टी -- बदले सारी सृष्टी मुक्त मैं --- पेहले सें यही बंधन मुझ में --- कभी भी नही ...... II4II इच्छा अपेक्षा रही -- कुछ भी बाकी जनम का बंधन -- वही बन गई सारा बंधन -- जनम करम का यही जुटाना जमाना समस्या -- जीवन कीं बनी समस्या वही -- बाकी रहा जो भी संसार मिथ्या और -- झूठा शरीर भी नश्वरता कें जगत कीं -- इच्छा क्यूँ करनी ? सबकुछ त्यागकर --- छोड इच्छाए सारी इच्छाओ कीं समाप्ती -- यही है मुक्ती इच्छा कीं अप्राप्ती -- बने दुःख कीं आपत्ती सुखंदुःख आनेजाने उनकी -- इच्छा क्यूँ करनी ? सुखं अपेक्षा त्याग सें -- दुःख कीं निवृत्ती सुखदुःख कीं निवृत्ती -- सें शाश्वत सुखं कीं प्राप्ती जो पहलेसें हूं -- बन जाऊ वही शाश्वत आनंद प्रज्ञान -- निजस्वरूप कीं निश्चिती समाधान तृप्ती सें -- सत आनंद शांती मुक्त मैं --- पेहले सें यही बंधन मुझ में --- कभी भी नही मुक्त हूं --- पेहले सें यही बंधन मुझ में --- कभी भी नही बंधन मुझ में --- कभी भी नही ...... II5II
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