Wise Words
Home
Read
Write
Publish
Profile
Logout
माया मेरी माँ
स्वप्रकाश
मेरी माँ, मेरी माँ, माया मेरी माँ। सबसे सच्ची, सबसे अच्छी, सबसे प्यारी माँ। तेरी काया से जन्मा हूँ, तुझसे ही पोषण पाया है। इस जगत में जन्म देकर, मुझे जीवन जीना सिखाया है। जब भी रोया, तूने ही सीने से लगाया है। मेरे हर एक नखरे को, तूने ही तो सिर पे बिठाया है। जितना तूने प्रेम दिया है, इस जगत में कोई नहीं दे पाया है। जन्म से लेकर मृत्यु तक, ये जीवन तो तेरा ही साया है । मेरी माँ, मेरी माँ, माया मेरी माँ। सबसे सच्ची, सबसे अच्छी, सबसे प्यारी माँ।.......... तू ही देवी तू ही शक्ति, तू ही तो ये संपूर्ण माया है। ये लोक और परलोक, सभी तो तुझमें समाया है। तू ही मेरी सच्ची साथी, तू ही मेरा पहला प्रेम। तू ही मेरा प्रथम गुरु है, जीने का सलीका तूने सिखाया है। निस्वार्थ प्रेम की जीवित देवी, मुझ पर असीम प्रेम बरसाया है। तुझे न कोई जान पाया, मेरी माँ तो महामाया है। मेरी माँ, मेरी माँ, माया मेरी माँ। सबसे सच्ची, सबसे अच्छी, सबसे प्यारी माँ।.......... तू ही दूध बनकर, बचपन में पोषण देती है। तू ही पञ्च तत्व बनकर, जीवन को पोषित करती है। तू ही इन्द्रियाँ बनकर, जगत -शरीर का अनुभव कराती है। तू ही भावना बनकर, सुख-दुःख का अहसास कराती है। तेरे सतोगुण से उपजा ज्ञान, रजोगुण से अहमभाव आया है। रजोगुण से ही इंद्रियां बनी हैं। तमोगुण से पंचभूती जगत आया है। मेरी माँ, मेरी माँ, माया मेरी माँ। सबसे सच्ची, सबसे अच्छी, सबसे प्यारी माँ।.......... तू ही श्वास बनकर, इस तन को चलाती है। तू ही लहू बनकर, इस देह में शक्ति संचार कराती है। तू ही स्मृति बनकर, जीवन का आभास कराती है। तू ही अहम बनकर, मेरी उत्तरजीविता चलाती है। तू ही बुद्धि बनकर, मुझे विज्ञान सिखाती है। तू ही प्राण बनकर, इस शरीर से कर्म कराती है। मेरी माँ, मेरी माँ, माया मेरी माँ। सबसे सच्ची, सबसे अच्छी, सबसे प्यारी माँ।.......... जब भी मेरी काया को, जरा एवं रोगों ने सताया है। तूने ही अपनी कोख में समाकर, मुझे कष्टों से मुक्त कराया है। तूने ही ज्ञान बनकर, मुझे मेरे तत्व का बोध कराया है। तूने ही गुरु रूप में, मुझे साक्षी से मिलाया है। आभारी हूँ तेरा, तूने ही तो ये अस्तित्व बनाया है। तेरा ऋण कोई नहीं चुका पाया, हर जन्म में सभी ने माँ को पाया है। मेरी माँ, मेरी माँ, माया मेरी माँ। सबसे सच्ची, सबसे अच्छी, सबसे प्यारी माँ।.......... <font color="green">**सभी सुखी हों, सभी समृद्ध हों, सभी ज्ञानवान हों, सभी मुक्त हों ....**</font> <font color="green">**श्री गुरुवे नमः ....ॐ शांति शांति शांति .....**</font> <font color="blue">**आभार: मैं परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री तरुण प्रधान जी एवं गुरुक्षेत्र का उनकी शिक्षाओं एवं मार्गदर्शन के लिए आभारी हूँ।**</font> संपर्क सूत्र.. साधक की कलम से : स्वप्रकाश....... ईमेल: swaprakash.gyan@gmail.com
Share This Article
Like This Article
© Gyanmarg 2024
V 1.2
Privacy Policy
Cookie Policy
Disclaimer
Terms & Conditions