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अनुभव बादल सत्य गगन
निशिगंधा क्षीरसागर
अनुभव बादल आते जाते बादल अवस्था घटती मुझ में जागृती है अवस्था अस्तित्व में सारी अवस्था घटती उसी में फिर भी परे अस्तित्व सब सें जागृती है अवस्था अस्तित्व में नित्य बदलती रात्री नींद में कभी जागृत कभी स्वप्न में और कभी कभी सुषप्ती में एक कें बाद एक आवर्त में चलित तत्व गतिमान सृष्टी में घटना वस्तू पदार्थ परिवर्तन में दृष्य दिखते अज्ञान भ्रम सें दृष्यमात्र सारी अवस्थाए मुझ में द्रष्टा साक्षी नित्य सदा सें मात्र मेरा होनापन द्रष्टाभाव में मैं सदासें नित्य अचलता में......!!! अचलता कैसी?- गगन जैसे बादल आते बादल जाते रूप रंग आकार लाते इंद्रधनू कें रंग बिखरते दृष्य आकार रंग भासते यू आते और मिट जाते वास्तव नही मात्र भासते अलग सदा उंचे गननसें गनन निरंतर निर्विकार सबमें नित्य स्थित परदा जैसे ......!!! सपने सें जागा जीव अज्ञान सें अज्ञानी जीव इस जीवन में जागा हुआ जगत जीव में मात्र आभास कल्पित मन सें सारी सृष्टी दिखती प्रतिती सें जग जैसा कुछ होता नहीं मन नही तो जगत भी नही मन सें जीवन सृष्टी बनी गुरु बताते मै मन बुद्धी नही और सृष्टी कभी हुई नही ......!!! चक्रीय जीवन सृष्टी एक चक्र जीव जीवन जगत है आवर्त आलात चक्र है जीव का जगत गती सें भासता जो होता नही चित्र है भासमान विद्यमान नही गती मुझ में है हि नही गती सें जीवन स्वप्न बना स्वप्न सें सृष्टी जीव जगत बना वास्तव में कुछ बना नही स्वप्न द्रष्टा मैं सदा सें यही जीवन का केंद्र बना मैं हि निश्चल नित्य निर्विकार चैतन्य अनुभवता खुद में खुद को अनंत सदा सें स्थिर में गती पानीपर जैसे लेहरो कीं गती खेल प्रतिती अनुभव है जीवन बस्स है आभास सपना जीवन ......!!! बारिश बरसे गनन भीजे नही मात्र कुछ क्षण चमके बिजली चमके क्षणभर बरसे दिनभर समय स्थान सत्यता नही न चमक न बारिश न बादल सत्य विवेक दृष्टी बुद्धी बताए बादलो सें उठ जा उपर आकार रूप रंग सें परे तेजोमय है गनन मेरा सदन गननरूपी पटल जिसपे उभरे चित्र कृपणभाव छोड बनजा ब्रह्म अकृपण जो असीम ब्रह्मांड सीमाओ रंग रुप सें परे अस्तित्व सर्वत्र सर्वगत सर्वव्याप्त ......!!! रंग रुप आकार मिथ्या इन सब में क्या है नित्यता?? घटना अवस्थाए , ऋतू बदलता दिन और रात चक्र बदलता बदलती इस दुनिया को देखता मैं अछूता कभी न बदलता विलग होकर सब को देखता मुझ में कोई बदलाव न दिखता मैं बस्स होनामात्र नित्य हूं सदा गगन अवकाश उन्नत व्योम ब्रह्मा ......!!! गगन बादल दृश्य नजारे यश अपयश कें लौकिक किनारे ज्ञान कीं नैय्या चप्पू साधना कें दूर हटी अब सारी अज्ञानी मान्यताए सुखदुःख भावना वृत्ती आवेग सारे सगे संबंधी मित्र सखा आते जाते होते हि नही केवल दिखते जैसे बादल रंग आकार आते जाते गनन सदा सें अनछूता सब सें घटना परिस्थिती जीवन दृष्टी बदले रंग रूप दृश्य बादल सारे गनन सा उन्नत न्यारा सब सें मैं अछुता विरला सब सें गनन सा उन्नत अवस्थित सदा सें मैं अछुता बिरला सब सें ......!!!
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