ज्ञानाक्षर
साधक के गुण
जानकी
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**साधक के गुण ** जीज्ञासा, रुचि ज्ञनका, सहजता, इच्छा रहे मुक्ति का। बुद्धि का उपयोग किन्तु परित्याग चातुर्य का जुक्ति का॥ धैर्यता, दृढ निश्चय, सहनशील, सत्य व निष्ठा कला। लेखन मे परिपूर्णता, निडरता, संचार कौशल गला॥ श्रद्धालु, गुण, सीप, नैतिक, सफल, तार्किक, विनम्र, भला। स्वतन्त्र, गुरु भाविता, बचन में हो मन्त्र मुग्ध कला।। शुद्ध हो मन और स्वास्थ तन का, शुद्ध समालोचना। आज्ञा पालक, सारग्रहित कला, आचार, विवेकीपना॥ ऐसा साधक ग्राह्य ज्ञान पथ में वारिस है ज्ञान का। श्रोता, पाठक, इन्द्रजीत गुण का स्वतंत्र ईमान का॥ ज्ञानी भाव, सदा समर्पित रहे, उद्धार करें लोग का। सांसारी मत, वासना निरस हो, इच्छा न हो भोग का॥ उल्लेखित गुण, मोक्ष ख़ातिर बड़ा अमृत है निर्झर। बुद्धि से गुण ज्ञान से सफलता, सम्बन्ध है निर्भर॥ जो व्यक्ति गुण जन्म से सहित हो कृपा गुरुक्षेत्र का। ऐसा जो गुरु लक्ष्य में लगन हो तारा बनें नेत्र का॥ *** ज्ञान एवं शब्द साभार - सद्गुरु श्री तरुण प्रधान जी, बोधि वार्ता, ज्ञानदीक्षा कार्यक्रम।