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ज्ञानमार्ग: अंतिम आध्यात्मिक मार्ग।
सत्यम
ज्ञानमार्ग एक शुद्ध एवं सरल आध्यात्मिक मार्ग है। यह सबसे छोटा एवं अंतिम मार्ग है, जहां यदि शिष्य तैयार है, तो कुछ ही पलों में ज्ञान दिया जा सकता है। ज्ञानमार्ग पर कोई मान्यता नहीं, कोई अंधविश्वास नहीं, कोई कर्मकांड नहीं, केवल और केवल शुद्ध ज्ञान मिलता हैं। यहां कुछ अतिरिक्त जोड़ा नहीं जाता, बल्कि जो अनावश्यक जमा किया गया है, उस अज्ञान को घटाया जाता है। और धीरे धीरे सम्पूर्ण अज्ञान को शून्य कर देना ही, ज्ञानमार्ग का लक्ष्य है। बिना अज्ञान के जो स्थिति है, उसे ही ज्ञानमार्ग में "ज्ञान होना" कहते हैं। तो सटीक शब्दों में कहें, तो ज्ञानमार्ग में कोई ज्ञान नहीं होता, बस अज्ञान का सम्पूर्ण विनाश होता है। जिस कारण से ज्ञानमार्ग को विनाशक मार्ग भी कहा जाता है। क्योंकि इसके बाद कुछ नहीं बचता; न साधक बचता है, न संसार बचता है, न गुरु बचता है, न मार्ग बचता है। इसीलिए ज्ञानमार्ग को अंतिम मार्ग भी कहते हैं क्योंकि इसके बाद कुछ और जानने की कोई आवश्यकता शेष नहीं रह जाती। जो लोग ज्ञानमार्ग में कुछ पाने की इच्छा से आते हैं उनको यहां केवल निराशा मिलती हैं। यह छीनने वाला मार्ग है। यह आपसे आपके सभी अज्ञान स्वरूप बंधन, दुख, मान्यताएं, धारणाएं, अंधविश्वास, मत आरोपण आदि सब छीन लेगा। और आपको पूरी तरह मुक्त कर देगा। इसीलिए कृपा पूरी तरह सोच विचार करके ही ज्ञानमार्ग में आएं। ज्ञानमार्ग में **क्या जाना जाता है?** ज्ञानमार्ग में ज्ञान देने की प्रक्रिया के दौरान मुख्यत: तीन ज्ञान कराए जाते है:- १.) पहला आत्मज्ञान: मै कौन हूं? या मेरा वास्तविक स्वरूप क्या है? यह ज्ञान आत्मज्ञान कहलाता है। २.) दूसरा माया का ज्ञान: संसार में जितने भी अनुभव हो रहे है, वे क्या हैं? इन अनुभवों का सत्य क्या हैं? यह सभी अनुभव माया और मिथ्या कैसे है इसका ज्ञान माया का ज्ञान कहलाता है। ३.) तीसरा ब्रह्मज्ञान: संपूर्णता क्या है? ब्रह्म क्या है? और यह मुझसे कैसे संबंधित है? इसका ज्ञान कराया जाता है। यह ज्ञान ब्रह्मज्ञान या अस्तित्व का ज्ञान कहलाता है। इन तीन प्रकार के ज्ञान को ज्ञानमार्ग में "**मूलज्ञान या तत्वज्ञान**" भी कहा जाता है। ज्ञानमार्ग में किस **विधि** से ज्ञान कराया जाता है:- १) सटीक और सीधी भाषा: ज्ञानमार्ग में आपकी भाषा का अच्छा होना अनिवार्य है। क्योंकि यहां पर सारी शिक्षाएं मौखिक या लिखित रूप में ही दी जाती है, और यदि भाषा की समझ नहीं हुई, तो शिक्षाओं को गलत रूप में समझा जा सकता है। जिससे आपका और शिक्षक का दोनों का समय और ऊर्जा बेवजह ही नष्ट होंगे। इसीलिए सबसे पहले कृपया भाषा पर अच्छी पकड़ बनाएं, जिससे जो बताया जा रहा है और जो समझा जा रहा है उसमें भेद न आए। २) ज्ञान के साधन: आपके अनुभव और आपकी तर्क शक्ति को ही यहां पर ज्ञान के साधनों के रूप में स्वीकार किया जाएगा। जिससे सत्य और ज्ञान तक पहुंचा जा सके। ३)सत्य के मानदंड: अद्वैत का सत्य का एक कठोर मानदंड है। जिसकी सहायता से हम सत्य क्या है और असत्य क्या है उसमें भेद करेंगें। परंतु उसके पहले हम यह भी जानेंगे कि क्या यह मानदंड तार्किक है भी या नहीं। ४) इसी दौरान अन्य कुछ प्रयोग एवं सिद्धांतों की भी मदद ली जाएगी। जोकि बिल्कुल तार्किक होंगे और हमें मार्ग में आगे बढ़ने में सहायता करेंगे। ५) अनुशासित मार्ग: यह एक अनुशासित मार्ग है जहां पर साधक को मार्गदर्शन के अनुसार ही आगे बढ़ना चाहिए। बिना अनुशासन के कोई भी कार्य सिद्ध नहीं होता है और वही बात ज्ञानमार्ग पर भी लागू होती है। इसीलिए ज्ञानमार्ग पर अनुशासित रहकर अपनी ज्ञान पिपासा का अंत करने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञानमार्ग में **गुरु** किसे कहते हैं? गुरु वह है, जो आपसे ज्यादा जानता है। या जितना आप जानते हैं गुरु उससे ज्यादा जानते हैं। परंतु गुरु आपसे कितना ज्यादा जानता है, यह आप नहीं जानते। इसीलिए गुरु के हर निर्देश का पालन अवश्य करना चाहिए जिससे वे आपको भी ज्ञान में अपने समतुल्य ला सके। गुरु एक से ज्यादा भी हो सकते हैं। ऐसा हो सकता है कि पहले आपके कोई गुरु रहे हो, और अब आप ज्ञानमार्ग में आए हो, तो आपने श्री तरुण प्रधान जी को अपना गुरु स्वीकार किया हो। गुरु और ज्ञान के साधनों द्वारा ही साधक की प्रगति होती है, और अंततः अज्ञान का सम्पूर्ण विनाश होता है। ज्ञानमार्ग पर **साधक** कौन है? वो जो ज्ञान को पाने की इच्छा रखता है और उसे पाने के लिए साधना करता है। वह साधक कहलाता हैं। ज्ञानमार्ग पर एक योग्य साधक के गुण बताए जाते हैं जिनके होने पर ही, गुरु किसी भी साधक को स्वीकार करते हैं एवं दीक्षा प्रदान करते हैं। ज्ञानमार्ग में **क्या मिलता है?** ज्ञानमार्ग में कुछ नहीं मिलता। अज्ञान के रूप में, जो पहले से मिला हुआ है, वो भी छीन लिया जाता हैं। इसीलिए ज्ञानमार्ग शुद्धि का मार्ग है। इससे कोई सांसारिक इच्छा पूर्ति नहीं होती। यहां पर न मान सम्मान मिलता है, न रुपया पैसा कमाने का साधन ही मिलता है। यहां बस शुद्ध ज्ञान मिलता है। ज्ञानमार्ग आत्मसुधार के लिए भी नहीं है, परंतु ज्ञान होने पर, ज्ञान के प्रभाव आचरण में दिखाई देने लगते है। ज्ञानमार्ग एक **विनाशक मार्ग** है। ज्ञानमार्ग में अज्ञान रूपी सभी अशुद्धियों को नष्ट किया जाता हैं। सभी प्रकार के अज्ञान रूप जैसे बिना प्रमाणित मान्यताएं, धारणाएं, मत आरोपण, कल्पनाएं, परिकल्पाओं आदि का विनाश किया जाता हैं जोकि साधक के दुःख एवं बंधन का कारण बना हुआ है। इसलिए ज्ञानमार्ग को विनाशकारी मार्ग भी कहा जाता है। यह कुछ देता नहीं, सबकुछ छीन लेता है। ज्ञानमार्ग **सबके लिए नहीं** है। जो ज्ञान के अधिकारी है, जिसमें साधक के पर्याप्त गुण हैं, जो ज्ञान की प्यास रखते है। ज्ञानमार्ग केवल उन्हीं के लिए है, बाकी अन्य सभी प्रकार की इच्छाएं रखने वाले, ज्ञानमार्ग से केवल निराशा लेकर जाते हैं। यदि आप इन सभी शर्तों के साथ ज्ञानमार्ग पर आकर, ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, तो ज्ञानमार्ग पर आपका हार्दिक स्वागत है। धन्यवाद।
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