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बोधि हंसा चला रे लेकर ज्ञान के मोती
स्वप्रकाश
<br><br><div class='ui image'><img width='1200px' src='images/69840537-बोधि हंसा.png'></div><br><br> बोधि हंसा चला रे, लेकर ज्ञान के मोती। आत्मबोध से बिखरा लो, अज्ञानी जीवन में ज्ञान की ज्योति ।। बोधि हंसा आया है, लेकर आत्मज्ञान का संदेश। गांव-गांव और शहर से लेकर, ढूंढें साधक देश विदेश।। अज्ञान में साधक बिसरा बैठा, कई जन्मों की साधना। ज्ञानमोती का प्रकाश पाकर, पूर्ण करो अपूर्ण साधना।। सीमित देह को छोड़कर, असीम अस्तित्व पहचान। साक्षी है, दृष्टा है तू; अपने सत्य में स्थित हो जा नादान।। जैसे कीचड़ में कमल खिलता है। वैसे ही माया में आत्मज्ञान से, तत्व मिलता है।। बोधि हंसा चला रे, लेकर ज्ञान के मोती। आत्मबोध से बिखरा लो, अज्ञानी जीवन में ज्ञान की ज्योति ।। ये मिट्टी की देह तो, मिट्टी में मिल जानी है। जिसके पीछे तू भागता है, वो माया तो आनी जानी है।। सोना चांदी मणि माणिक्य, यह तो मायाजाल । ज्ञानमोती पाकर के, हो जाओ मालामाल।। ज्ञानमोती ही तेरी असली दौलत, उसको तू पहचान। मिथ्या माया छोड़कर, साक्षी का कर ले ध्यान।। बोधि हंसा चला रे, लेकर ज्ञान के मोती। आत्मबोध से बिखरा लो, अज्ञानी जीवन में ज्ञान की ज्योति।। जगत में कितने रिश्ते बनाया, सच्चा रिश्ता फिर भी न पाया। हर रिश्ते में स्वार्थ मिला, फिर भी ठोकर खाकर समझ न आया।। रिश्ते सारे निचले तल के, उत्तम रिश्ता एक ही पाया। गुरु शिष्य का चैतन्य रिश्ता, जिसने मुक्ति का द्वार दिखाया।। गुरु कृपा से मैं भी बोधि हंसा हो जाऊं। जगह जगह जाकर के ज्ञानमोती बिखराऊं।। बोधि हंसा चला रे, लेकर ज्ञान के मोती। आत्मबोध से बिखरा लो, अज्ञानी जीवन में ज्ञान की ज्योति ।। असत की संगत छोड़कर, सत की शरण में जाए। गुरु ही तेरा सच्चा साथी, गुरु की शरण अपनाए।। गुरु की कृपा ग्रहण कर, पा ले अमरता का वरदान। ज्ञानामृत पीकर के, अमर हो जा नादान।। आभारी हूं गुरुदेव का, जो मेरे तत्व का दरस करा दिया। ज्ञानमोती के प्रकाश से, मुझे भी बोधि हंसा बना दिया।। बोधि हंसा चला रे, लेकर ज्ञान के मोती। आत्मबोध से बिखरा लो, अज्ञानी जीवन में ज्ञान की ज्योति ।। <font color="green">**सभी सुखी हों, सभी समृद्ध हों, सभी ज्ञानवान हों, सभी मुक्त हों........**</font> <font color="green">**श्री गुरुवे नमः ....ॐ शांति शांति शांति .....**</font> <font color="blue">**आभार: मैं परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री तरुण प्रधान जी एवं गुरुक्षेत्र का उनकी शिक्षाओं एवं मार्गदर्शन के लिए आभारी हूँ।**</font> ***संपर्क सूत्र.. साधक की कलम से : स्वप्रकाश....... ईमेल: swaprakash.gyan@gmail.com*
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