ज्ञानाक्षर
व्यक्ति तू तो बहरूपिया
स्वप्रकाश
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व्यक्ति तू तो बहरूपिया, बदले कितने रूप। नाम-रूप, शरीर मन; सभी तो मिथ्या रूप।। १ पहन कर नकली मुखौटा, पल पल करे तू व्यवहार। आदिम अहम और नैतिक अहम, को संतुलित करे तेरा अहम भाव ।। तेरे अहम के पीछे बैठा, तेरा ही सत्य स्वरूप। चेतन और अचेतन से परे, तू है ब्रह्म स्वरूप।। व्यक्ति तू तो बहरूपिया, बदले कितने रूप। नाम-रूप, शरीर मन; सभी तो मिथ्या रूप।।२ और पाने की चाह में, तू सत्य से दूर ही जायेगा। पाए हुए को नेति-नेति से खोकर, ही तू आत्मन हो जाएगा ।। जिस शरीर को सत्य समझे, वह तो निद्रा में खो जाता है। स्वप्न के जैसा स्थूल भी अनित्य है, इसकी मिथ्या को नहीं जान पाता है।। व्यक्ति तू तो बहरूपिया, बदले कितने रूप। नाम-रूप, शरीर मन; सभी तो मिथ्या रूप।। ३ स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर, सभी हैं आनी जानी माया। सभी शरीरों के परे है तू, माया तो है बस तेरी छाया।। माया की छाया के पीछे बैठा, तू है परम तत्व। सभी कोषों के परे जाकर, पा ले अपना अस्तित्व।। व्यक्ति तू तो बहरूपिया, बदले कितने रूप। नाम-रूप, शरीर मन; सभी तो मिथ्या रूप।। ४ तेरे ही मन की प्रतिकृति, ये माया तो है उस ब्रह्मन का मन। ये जगत शरीर मन सभी है, उस सर्वम का ही मन।। सत्व, रज, तमोगुण; सभी हैं माया रूप। तू क्यों भागे इनके पीछे, तू ही सत्य स्वरुप।। व्यक्ति तू तो बहरूपिया, बदले कितने रूप। नाम-रूप, शरीर मन; सभी तो मिथ्या रूप।।५ ये बहरूपिया व्यक्ति तू नहीं, जो पल पल बदले रूप। नित्य है, सत्य है तू, तू है सच्चिदानंद स्वरूप।। जब गुरु की शरण में जाकर, अज्ञान के मुखौटे हटाएगा। मुक्ति तेरी तभी होगी, जब तू अंत में शून्य हो जायेगा ।। व्यक्ति तू तो बहरूपिया, बदले कितने रूप। नाम-रूप, शरीर मन; सभी तो मिथ्या रूप।।६ <font color="green">**सभी सुखी हों, सभी समृद्ध हों, सभी ज्ञानवान हों, सभी सत्य जानें ........**</font> <font color="blue">**श्री गुरवे नमः ....ॐ शांति शांति शांति .....**</font> <font color="blue">***आभार: मैं परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री तरुण प्रधान जी एवं गुरुक्षेत्र का उनकी शिक्षाओं एवं मार्गदर्शन के लिए आभारी हूँ।***</font> संपर्क सूत्र.. साधक की कलम से : स्वप्रकाश....... ईमेल: swaprakash.gyan@gmail.com