Wise Words
प्रश्नोत्तर-रत्नमालिका-मणि
तरुण प्रधान
# ॥ प्रश्नोत्तर-रत्नमालिका-मणि ॥ <br><br> हिंदी अनुवाद और संपादन तरुण प्रधान <br><br> ### अनुवादक की टिप्पणी <br> यहाँ **भगवत्पाद आदि शंकराचार्य विरचित प्रश्नोत्तर-रत्नमालिका** के चुने हुए श्लोकों का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। मूल संस्कृत श्लोकों के साथ प्रश्नोत्तर प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है। कई कठिन संस्कृत शब्दों के अनुवाद के लिए जेमिनी यंत्र सहायक रहा है । अर्थ स्पष्ट करने के लिए कहीं-कहीं टिप्पणियां जोड़ी गई हैं । इसके कई संस्करण संस्कृत, हिंदी और अंग्रेज़ी में इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। मूल पाठ में कुल ६७ श्लोक हैं जिन में से मैंने कुछ श्लोक ज्ञानमर्गियों के लाभार्थ चुने हैं । यहाँ उत्सुक पाठक के लिए मूल प्रतियों की दो कड़ियाँ दी जा रही हैं। https://sriadishankarastutis.org/wp-content/uploads/2019/04/Book-44-Stotra-1-Bhagavatpadas-Pranottara-Rathnamalika.pdf https://archive.org/details/prashnottara-ratna-malika-of-shri-shankara-in-24-indian-languages-sahitya-academy/page/210/mode/2up --- <br><br> ### ॥ प्रश्नोत्तर-रत्नमालिका-मणि ॥ <br><br> कः खलु नालङ्कियते दृष्टादृष्टार्थसाधनपटीयान् । अमुया कण्ठस्थितया प्रश्नोत्तररत्नमालिकाया ॥ १ ॥ **वह कौन है जो इस 'प्रश्नोत्तर-रत्नमालिका' रूपी आभूषण को अपने कंठ में धारण करते हुऐ, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों साधनों द्वारा सभी फल प्राप्त न कर सके ?** (इस प्रश्नोत्तर मलिका को कंठस्थ करने पर साधक अपेक्षित फल प्राप्त करता है ।) --- भगवन्किमुपादेयं? गुरुवचनम् । हेयमपि च किम्? अकार्यम् । को गुरुरधिगततत्त्वः शिष्याहितायोद्यतः सततम् ॥ २ ॥ **प्रश्न:** हे भगवन्! उपादेय (ग्रहण करने योग्य) क्या है? **उत्तर:** गुरु का वचन। (साधक के लिए गुरु के निर्देशों का पालन करना और उपदेशों पर मनन करना, उनको ग्रहण करना सबसे लाभदायक है ।) **प्रश्न:** त्याज्य (त्यागने योग्य) क्या है? **उत्तर:** अकार्य (दुष्कर्म या अनैतिक कार्य)। **प्रश्न:** गुरु कौन है? **उत्तर:** जिसने तत्त्व (ब्रह्म) का ज्ञान प्राप्त कर लिया हो और जो निरंतर शिष्यों के हित के लिए तत्पर हो। (तत्वज्ञान अर्थात आत्मज्ञान या सत्य का ज्ञान ।) --- त्वरितं किं कर्तव्यं विदुषा? संसारसंततिच्छेदः । किं मोक्षतरोर्बीजं? सम्यग्ज्ञानं क्रियासिद्धम् ॥ ३ ॥ **प्रश्न:** विद्वान को शीघ्रता से क्या करना चाहिए? **उत्तर:** संसार रूपी बंधन (जन्म-मरण के चक्र) का छेदन (अंत)। **प्रश्न:** मोक्ष रूपी वृक्ष का बीज क्या है? **उत्तर:** सम्यक ज्ञान (सत्य का ज्ञान) जो जीवन में प्रयुक्त हो। (सुना हुआ या पढा हुआ ज्ञान मुक्ति/मोक्ष नहीं देता जब तक उसका जीवन में प्रयोग ना हो ।) --- कः पथ्यतरो? धर्मः, कः शुचिरिह? यस्य मानसं शुद्धम् । कः पण्डितो? विवेकी, किं विषमवधीरणा गुरुषु ॥ ४ ॥ **प्रश्न:** सबसे अधिक कल्याणकारी क्या है? **उत्तर:** धर्म (सत्य या तत्व के ज्ञान पर आधारित आचरण ।) **प्रश्न:** पवित्र कौन है? **उत्तर:** जिसका मन शुद्ध है। **प्रश्न:** पंडित (ज्ञानी) कौन है? **उत्तर:** जो विवेकी है । (सत्य-असत्य और सही-गलत का भेद जानने वाला)। **प्रश्न:** विष क्या है? **उत्तर:** गुरुजनों की अवहेलना (तिरस्कार) करना। (ज्ञान प्रदान करने वालों का और ग्रहण करने वालों का अपमान करना विष पीने या उगलने के समान है ।) --- किं संसारे सारं? बहुशोऽपि विचिन्त्यमानमिदमेव । किं मनुजेष्विष्टतमं? स्वपरहितायोद्यतं जन्म ॥ ५ ॥ **प्रश्न:** इस संसार का सार क्या है? **उत्तर:** (जानने के लिए) इस प्रश्न पर लगातार चिंतन करना चाहिए । **प्रश्न:** मनुष्यों के लिए सबसे इष्ट (श्रेष्ठ) जन्म क्या है? **उत्तर:** वह जीवन जो अपने और दूसरों के हित (कल्याण) में लगा हो। (जो पहले अपना कल्याण करता है वही दूसरों का कर पाता है ।) --- मदिरेव मोहजनकः कः? स्नेहः, के च दस्यवो? विषयाः । का भववल्ली? तृष्णा, को वैरी? यस्त्वनुद्योगः ॥ ६ ॥ **प्रश्न:** मदिरा (शराब) की भांति मोह उत्पन्न करने वाला कौन है? **उत्तर:** स्नेह (आसक्ति, लगाव, मैं और मेरा का भाव)। **प्रश्न:** डाकू (चोर) कौन हैं? **उत्तर:** इंद्रियों के विषय (रूप, रस, गंध आदि जो बुद्धि को हर लेते हैं।) **प्रश्न:** संसार रूपी लता क्या है? **उत्तर:** तृष्णा (इच्छा या वासनाएं संसार में बार-बार जन्म का कारण हैं )। **प्रश्न:** शत्रु कौन है? **उत्तर:** अनुद्योग (आलस्य या उद्यमहीनता जो मनुष्य का नाश करता है)। --- कस्माद्भयमिह? मरणादन्धादिह को विशिष्यते? रागी । कः शूरो? यो ललनालोचनबाणैर्न च व्यथितः ॥ ७ ॥ **प्रश्न:** यहाँ भय किससे है? **उत्तर:** मृत्यु से। **प्रश्न:** अंधों से भी अधिक अंधा कौन है? **उत्तर:** रागी (कामातुर या विषयासक्त व्यक्ति)। **प्रश्न:** शूरवीर कौन है? **उत्तर:** जो स्त्रियों के नयन रूपी बाणों से व्यथित (विचलित) नहीं होता। --- पातुं कर्णाञ्जलिभिः किममृतमिह युज्यते? सदुपदेशः । किं गुरुताया मूलं? यदेतदप्रार्थनं नाम ॥ ८ ॥ **प्रश्न:** कानों रूपी अंजुलि से पीने योग्य अमृत क्या है? **उत्तर:** सदुपदेश (सत्पुरुषों के वचन)। **प्रश्न:** गुरुता (महानता/बड़प्पन) का मूल सूत्र क्या है? **उत्तर:** किसी से कुछ भी न मांगना (याचना न करना)। (मांगने वाला भिखारी हो सकता है गुरु/बडा नहीं ।) --- किं जीवितम्? अनवद्यं, किं जाड्यं? पाठतोऽप्यनभ्यासः । को जागर्ति? विवेकी, का निद्रा? मूढता जन्तोः ॥ १० ॥ **प्रश्न:** (सार्थक) जीवन क्या है? **उत्तर:** जो दोष रहित (निर्दोष, निष्कलंक) हो। **प्रश्न:** जड़ता (मूर्खता) क्या है? **उत्तर:** पाठ पढ़कर भी अभ्यास/प्रयोग न करना। (जो ज्ञान प्रयोग में ना लाया जाए वह बेकार है और बुद्धि को भ्रमित करता है ।) **प्रश्न:** जागृत कौन है? **उत्तर:** विवेकी पुरुष। (सत्य जानने वाला) **प्रश्न:** निद्रा क्या है? **उत्तर:** आम जनता की मूढ़ता (अज्ञान)। (अज्ञानी जागते हुए भी सो रहा है ।) --- नलिनीदलगतजलवत्तरलं किं? यौवनं धनं चायुः । कथय पुनः के शशिनः किरणसमाः? सज्जना एव ॥ ११ ॥ **प्रश्न:** कमल के पत्ते पर पड़े जल के समान चंचल (अस्थिर) क्या है? **उत्तर:** यौवन, धन और आयु/जीवनकाल। **प्रश्न:** बतायें, चंद्रमा की किरणों के समान (शीतल और आह्लादक) कौन हैं? **उत्तर:** सज्जन पुरुष ही। --- को नरकः? परवशता, किं सौख्यं? सर्वसङ्गविरतिर्या । किं सत्यं? भूतहितं, प्रियं च किं प्राणिनाम्? असवः ॥ १२ ॥ **प्रश्न:** नरक क्या है? **उत्तर:** परवशता (दूसरों के अधीन रहना)। (कितना भी आरामदायक और संपन्न हो गुलामी का जीवन नर्क है ।) **प्रश्न:** सुख क्या है? **उत्तर:** सभी आसक्तियों से विरक्ति (त्याग)। (दूसरों से और वस्तुओं से कभी सुख नहीं मिलता, यह अक्सर दुख का ही कारण होते हैं ।) **प्रश्न:** सत्य क्या है? **उत्तर:** जो प्राणियों के हित में हो। (जो उत्तरजीविता में उपयोगी है उसे सत्य मान लिया जाता है ।) **प्रश्न:** प्राणियों को क्या प्रिय है? **उत्तर:** अपने प्राण। (जीवित रहने के लिए व्यक्ति सब छोड़ सकता है, सत्य भी ।) --- कोऽनर्थफलो? मानः, का सुखदा? साधुजनमैत्री । सर्वव्यसनविनाशे को दक्षः? सर्वथा त्यागी ॥ १३ ॥ **प्रश्न:** अनर्थकारी फल देने वाला क्या है? **उत्तर:** मान (अहंकार, दंभ)। **प्रश्न:** सुख देने वाली क्या है? **उत्तर:** साधुजनों की मित्रता। (अच्छी संगत) **प्रश्न:** समस्त दुःखों और व्यसनों का नाश करने में कौन कुशल है? **उत्तर:** त्यागी (विरक्त) पुरुष जो सब त्याग चुका है। --- किं मरणम्? मूर्खत्वं, किं चानर्घं? यदवसरे दत्तम् । आमरणात्किं शल्यं? प्रच्छन्नं यत्कृतं पापम् ॥ १४ ॥ **प्रश्न:** मृत्यु के समान क्या है? **उत्तर:** मूर्खता। **प्रश्न:** अमूल्य क्या है? **उत्तर:** जो उचित अवसर (सही समय) पर प्राप्त हो। **प्रश्न:** मृत्यु तक शल्य (काँटे) की तरह क्या चुभता रहता है? **उत्तर:** जो पाप गुप्त रूप से किया गया हो। (छुपे हुये अनैतिक कर्म) --- कुत्र विधेयो यत्नो? विद्याभ्यासे सदौषधे दाने । अवधीरणा क्व कार्या? खलपरयोषित्परधनेषु ॥ १५ ॥ **प्रश्न:** प्रयत्न कहाँ करना चाहिए? **उत्तर:** विद्याभ्यास (ज्ञानार्जन) में, उत्तम औषधि (स्वास्थ्य) में और दान में। **प्रश्न:** उपेक्षा किसकी करनी चाहिए? **उत्तर:** दुष्ट जनों की, परायी स्त्री की और पराये धन की। --- कण्ठगतैरप्यसुभिः कस्य ह्यात्मा न शक्यते जेतुम् । मूर्खस्य शङ्कितस्य च विषादिनो वा कृतघ्नस्य ॥ १७ ॥ **प्रश्न:** प्राण कंठ में आ जाने पर भी (प्राणों की बाजी लगाकर भी) किसके चित्त को जीता नहीं जा सकता? **उत्तर:** मूर्ख के, शंकालु के, विषादी (हमेशा दुखी रहने वाले) के और कृतघ्न के। (इनको कितना भी सिखा दो, या इनको प्रसन्न करने के लिए कुछ भी करो, यह वैसे ही रहते हैं ।) --- कोऽन्धो? योऽकार्यरतः, को बधिरो? यो हितानि न शृणोति । को मूको? यः काले प्रियाणि वक्तुं न जानाति ॥ २१ ॥ **प्रश्न:** अंधा कौन है? **उत्तर:** जो अकार्य (बुरे कार्यों) में लगा है। **प्रश्न:** बहरा कौन है? **उत्तर:** जो हितकारी वचनों को नहीं सुनता। **प्रश्न:** गूंगा कौन है? **उत्तर:** जो उचित समय पर प्रिय वचन बोलना नहीं जानता। --- किं दानम्? अनाकाङ्क्षं, किं मित्रं? यो निवारयति पापात् । कोऽलंकारः? शीलं, किं वाचां मण्डनं? सत्यम् ॥ २१ ॥ **प्रश्न:** (श्रेष्ठ) दान क्या है? **उत्तर:** जो आकांक्षा (बदले में कुछ पाने की भावना से) रहित हो। **प्रश्न:** मित्र कौन है? **उत्तर:** जो पाप से रोकता है। **प्रश्न:** अलंकार (आभूषण) क्या है? **उत्तर:** शील (सदाचार)। **प्रश्न:** वाणी का आभूषण क्या है? **उत्तर:** सत्य। --- चिन्तामणिरिव दुर्लभमिह किं? कथयामि तच्चतुर्भद्रम् । किं तद्वदन्ति भूयो विधृततमसो विशेषेण ॥ २४ ॥ (यह श्लोक अगले श्लोक की भूमिका है) **प्रश्न:** चिंतामणि के समान दुर्लभ यहाँ क्या है? **उत्तर:** मैं उन चार भद्र (कल्याणकारी) वस्तुओं को बताता हूँ। **प्रश्न:** अज्ञान को दूर करने वाले ज्ञानी उसे क्या बताते हैं? (उत्तर अगले श्लोक में है) --- दानं प्रियवाक्सहितं ज्ञानमगर्वं क्षमान्वितं शौर्यम् । वित्तं त्यागसमेतं दुर्लभमेतच्चतुर्भद्रम् ॥ २५ ॥ **उत्तर:** १. प्रिय वचनों के साथ दान। २. अहंकार रहित ज्ञान। ३. क्षमा से युक्त शौर्य (वीरता)। ४. त्याग से युक्त धन। ये चार 'भद्र' अत्यंत दुर्लभ हैं। --- किं शोच्यं? कार्पण्यं, सति विभवे किं प्रशस्तम्? औदार्यम् । कः पूज्यो विद्वद्भिः? स्वभावतः सर्वदा विनीतो यः ॥ २६ ॥ **प्रश्न:** शोक करने योग्य क्या है? **उत्तर:** कृपणता (कंजूसी)। **प्रश्न:** वैभव होने पर प्रशंसनीय क्या है? **उत्तर:** उदारता। **प्रश्न:** विद्वानों द्वारा पूजनीय कौन है? **उत्तर:** जो स्वभाव से ही सर्वदा विनम्र हो। --- कः पङ्गुरिह प्रथितो? व्रजति च यो वार्धके तीर्थम् । किं तीर्थमपि च मुख्यं? चित्तमलं यन्निवर्तयति ॥ ३४ ॥ **प्रश्न:** यहाँ पंगु (लंगड़ा) किसे कहा गया है? **उत्तर:** जो बुढ़ापे में (जब शरीर साथ नहीं देता) तीर्थ यात्रा के लिए निकलता है (जवानी में कोई आध्यात्मिक साधना नहीं करता)। **प्रश्न:** मुख्य तीर्थ क्या है? **उत्तर:** जो चित्त के मल को दूर कर दे। (आत्म शुद्धिकरण सबसे महान तीर्थ है ।) --- किं सम्पाद्यं मनुजैः? विद्या वित्तं बलं यशः पुण्यम् । कः सर्वगुणविनाशी? लोभः, शत्रुश्च कः? कामः ॥ ३६ ॥ **प्रश्न:** मनुष्यों को क्या अर्जित करना चाहिए? **उत्तर:** विद्या, धन, बल, यश और पुण्य। **प्रश्न:** सर्व गुणों का विनाशक क्या है? **उत्तर:** लोभ। **प्रश्न:** शत्रु कौन है? **उत्तर:** काम (इच्छा)। --- का कल्पलता लोके? सच्छिष्यायार्पिता विद्या । कोऽक्षयवटवृक्षः स्यात्? विधिवत्सत्पात्रदत्तदानं यत् ॥ ३९ ॥ **प्रश्न:** संसार में कल्पवृक्ष समान क्या है? **उत्तर:** सत्शिष्य को दी गई विद्या। (सुपात्र शिष्य को दिया गया ज्ञान सबसे बड़ी संपत्ति है जो देने से और बढ़ती है।) **प्रश्न:** अक्षय वटवृक्ष कौन सा है? **उत्तर:** विधिपूर्वक सत्पात्र को दिया गया दान। (कुपात्र को दिया गया धन या विद्या बेकार जाता है ।) --- किं शस्त्रं सर्वेषां? युक्तिः, माता च का? धेनुः । किं नु बलं? यद्धैर्यं, को मृत्युः? यदवधानरहितत्वम् ॥ ४० ॥ **प्रश्न:** सबका शस्त्र क्या है? **उत्तर:** युक्ति (तर्क/बुद्धि)। **प्रश्न:** माता समान कौन है? **उत्तर:** धेनु (गौ)। **प्रश्न:** बल क्या है? **उत्तर:** धैर्य। **प्रश्न:** मृत्यु क्या है? **उत्तर:** असावधानी । --- कुत्र विषं? दुष्टजने, किमिहाशौचं भवेत्? ऋणं नृणाम् । किमभयमिह? वैराग्यं, भयमपि किं? वित्तमेव सर्वेषाम् ॥ ४१ ॥ **प्रश्न:** विष कहाँ है? **उत्तर:** दुष्ट जन में। **प्रश्न:** यहाँ अपवित्रता क्या है? **उत्तर:** मनुष्यों का ऋण। (पर निर्भरता) **प्रश्न:** यहाँ अभय (भय रहित स्थिति) क्या है? **उत्तर:** वैराग्य। **प्रश्न:** भय क्या है? **उत्तर:** धन (हानि न हो ये भय का कारण है)। --- कस्मात्सिद्धिः? तपसः, बुद्धिः क्व नु? भूसुरे, कुतो बुद्धिः । वृद्धोपसेवया, के वृद्धाः? ये धर्मतत्वज्ञाः ॥ ४३ ॥ **प्रश्न:** सिद्धि किससे मिलती है? **उत्तर:** तपस्या से। (कडी साधना से) **प्रश्न:** बुद्धि कहाँ है? **उत्तर:** ब्राह्मण (ज्ञानी) में। **प्रश्न:** बुद्धि कहाँ से आती है? **उत्तर:** वृद्धों (ज्ञानियों या बडों) की सेवा से। **प्रश्न:** वृद्ध या बडे कौन हैं? **उत्तर:** जो अपने तत्त्व को जानते हैं। --- को वर्धते? विनीतः, को वा हीयेत? यो दृप्तः । को न प्रत्येतव्यो? ब्रूते यश्चानृतं शश्वत् ॥ ४५ ॥ **प्रश्न:** किसकी प्रगति होती है? **उत्तर:** विनीत की। **प्रश्न:** किसका नाश होता है? **उत्तर:** जो अहंकारी है। **प्रश्न:** किस पर विश्वास नहीं करना चाहिए? **उत्तर:** जो हमेशा झूठ बोलता है। --- कः धन्यः? संन्यासी, को मान्यः? पण्डितः साधुः । कः सेव्यः? यो दाता, को दाता? योऽर्थितृप्तिमातनुते ॥ ५१ ॥ **प्रश्न:** धन्य कौन है? **उत्तर:** संन्यासी। **प्रश्न:** मान्य (आदरणीय) कौन है? **उत्तर:** विद्वान और साधु। **प्रश्न:** सेवा के योग्य कौन है? **उत्तर:** जो दाता है। **प्रश्न:** दाता कौन है? **उत्तर:** जो याचकों को तृप्त कर देता है। --- किं दुष्करं नराणां? यन्मनसो निग्रहः सततं । को ब्रह्मचर्यवां स्यात्यश्चास्खलितोर्ध्वरेतस्कः ॥ ५३॥ **प्रश्न:** मनुष्यों के लिए दुष्कर (कठिन) क्या है? **उत्तर:** मन का निरंतर निग्रह करना। **प्रश्न:** ब्रह्मचारी कौन है? **उत्तर:** जो कभी भी स्खलित (वीर्यपात) ना करके काम-ऊर्जा को ऊपर ले जाता है । --- का च परदेवतोक्ता चिच्छक्तिः को जगत्भर्ता । सूर्यः सर्वेषां को जीवनहेतुः स पर्जन्यः ॥ ५४॥ **प्रश्न:** परम देवता (देवी) कौन है ? **उत्तर:** चित्त शक्ति (माया) । **प्रश्न:** संसार का पोषण करने वाला कौन है ? **उत्तर:** सूर्य । **प्रश्न:** सभी जीव किसके कारण जीवित है ? **उत्तर:** वृष्टि । --- कः शुरो यो भीतत्राता त्राता च कः सद्गुरुः । को हि जगद्गुरुरुक्तः शम्भुः ज्ञानं कुतः शिवादेव ॥ ५५॥ **प्रश्न:** शूरवीर कौन है ? **उत्तर:** जो भयभीत की रक्षा करता है । **प्रश्न:** रक्षक कौन है ? **उत्तर:** सद्गुरु। **प्रश्न:** जगद्गुरु कौन है **उत्तर:** शिव । **प्रश्न:** ज्ञान किस से मिलता है **उत्तर:** शिव से । --- मुक्तिं लभेत कस्मान्मुकुन्दभक्तेः मुकुन्दः कः । यस्तारयेदविद्यां का चाविद्या यदात्मनोऽस्फूर्तिः ॥ ५६॥ **प्रश्न:** मुक्ति कैसे मिलती है ? **उत्तर:** मुकुंद (कृष्ण या विष्णु) की भक्ति से । **प्रश्न:** मुकुंद कौन है ? **उत्तर:** जो अज्ञान (अविद्या) के पार ले जाता है । **प्रश्न:** अविद्या क्या है ? **उत्तर:** जो आत्मन को ढकती है । (स्वयं के तत्व के ज्ञान को जो प्रकाशित होने न दे ।) --- को मायी परमेशः क इन्द्रजालायते प्रपञ्चोऽयम् । कः स्वप्ननिभो जाग्रद्व्यवहारः सत्यमपि च किं ब्रह्म ॥ ५८॥ **प्रश्न:** माया पर किसका नियंत्रण है ? **उत्तर:** परमेश्वर का । **प्रश्न:** इंद्रजाल क्या है ? **उत्तर:** संसार का प्रपंच ही इंद्रजाल (भ्रम) है । **प्रश्न:** सपने के समान क्या हैं ? **उत्तर:** जागृत अवस्था में किए गए व्यवहारिक कार्य । **प्रश्न:** सत्य क्या है ? **उत्तर:** ब्रह्म ही सत्य है । --- किं मिथ्या यद्विद्यानाश्यं तुच्छं तु शशविषाणादि । का चानिर्वाच्या माया किं कल्पितं द्वैतम् ॥ ५९॥ **प्रश्न:** मिथ्या क्या है ? **उत्तर:** विद्या द्वारा जिसका विनाश होता है । (ज्ञान से मिथ्या दिख जाती है ।) **प्रश्न:** तुच्छ (विचार) या अतार्किक क्या है ? **उत्तर:** खरगोश के सींग । (काल्पनिक धारणाओं का सत्य पर आरोपण । जैसे - बांझ का पुत्र, अस्तित्व की शुरुआत, मेरा जन्म आदि ।) **प्रश्न:** अनिर्वचनीय क्या है ? **उत्तर:** माया अनिर्वचनीय है (ना सत्य है ना असत्य, अज्ञेय है) । **प्रश्न:** क्या है जो कल्पना मात्र है ? **उत्तर:** द्वैत । (अनुभव और अनुभवकर्ता को, दो हैं और अलग हैं, ऐसा मानना ।) --- किं पारमार्थिकं स्यादद्वैतं चाज्ञता कुतोऽनादिः । वपुषश्च पोषकं किं प्रारब्धं चान्नदायि किं चायुः ॥ ६०॥ **प्रश्न:** पारमार्थिक (परमसत्य) क्या है ? **उत्तर:** अद्वैत । **प्रश्न:** अज्ञान कब शुरू हुआ ? **उत्तर:** अज्ञान अनादि है । **प्रश्न:** शरीर को क्या पोषण देता है (क्या जारी रखता है ) ? **उत्तर:** प्रारब्ध कर्म । **प्रश्न:** अन्न क्या देता है ? **उत्तर:** आयु (शरीर को बनाए रखता है)। --- कश्च कुलक्षयहेतुः सन्तापः सज्जनेषु योऽकारि । केषाममोघ वचनं ये च पुनः सत्यमौनशमशीलाः ॥ ६३॥ **प्रश्न:** कुल के क्षय का कारण क्या बनता है ? **उत्तर:** सज्जनों को दिया गया संताप (दुख) । **प्रश्न:** किन का वचन अमोघ (कभी असत्य ना होने वाला) होता है ? **उत्तर:** जो सत्य, मौन, शम और शालीनता से युक्त होते हैं । --- किं जन्म विषयसङ्गः किमुत्तरं जन्म पुत्रः स्यात् । कोऽपरिहार्यो मृत्युः कुत्र पदं विन्यसेच्च दृक्पूते ॥ ६४॥ **प्रश्न:** जन्म क्या है ? **उत्तर:** विषयों का संग ही जन्म है (विषयों से जुड़ना / लगाव) । **प्रश्न:** अगला जन्म क्या है ? **उत्तर:** पुत्र रूप । **प्रश्न:** अपरिहार्य क्या है **उत्तर:** मृत्यु । (जिसे टाला नहीं जा सकता ।) **प्रश्न:** अपने पैर कहां रखना चाहिए ? **उत्तर:** उस जगह जो शुद्ध हो । --- फलमपि भगवद्भक्तेः किं तल्लोकस्वरुपसाक्षात्त्वम् । मोक्षश्च को ह्यविद्यास्तमयः कः सर्ववेदभूः अथ च ॐ ॥ ६६॥ **प्रश्न:** भगवान की भक्ति का क्या फल मिलता है ? **उत्तर:** उनके लोक और उनके सत्य स्वरूप का साक्षात्कार । **प्रश्न:** मोक्ष क्या है ? **उत्तर:** अविद्या या अज्ञान से मुक्त होना ही मोक्ष है । **प्रश्न:** सभी वेदों का उद्गम क्या है ? **उत्तर:** ओंकार या ॐ । --- **फलश्रुति (अंतिम श्लोक)** इत्येषा कण्ठस्था प्रश्नोत्तररत्नमालिका येषाम् । ते मुक्ताभरणा इव विमलाश्चाभान्ति सत्समाजेषु ॥ ६७॥ जिनके कंठ में यह 'प्रश्नोत्तर-रत्नमालिका' स्थित है (अर्थात जिन्होंने इसे याद कर लिया है और आचरण में उतारा है), वे मोतियों का हार पहने हुए लोगों की भांति विमल ज्ञान से प्रकाशित होकर विद्वानों के समाज में सुशोभित होते हैं। **॥ इति श्रीमद् शङ्कराचार्यविरचिता प्रश्नोत्तररत्नमालिका समाप्ता ॥**
Share This Article
Like This Article
© Gyanmarg 2024
V 1.2
Privacy Policy
Cookie Policy
Powered by Semantic UI
Disclaimer
Terms & Conditions