ज्ञानाक्षर
अपने घर में मैं पराया
निशिगंधा क्षीरसागर
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अपने घर में मैं पराया टूटा संसार साथी सहारा संसार में अब मैं बेसहारा धुंडता यहाँ वहा साथी सच्चा ईश्वर मेरा सच्चा सहारा खुद को ढुंढू मैं आवारा सुखं दुःख सबकुछ हारा दुःख अब दुःख न रहा सुखं भी सुखं न रहा अब मैं बिलकुल अनाथ आनंदयात्री जीवन के साथ ईश्वर हि अब मेरे साथ हस्तीं मिटायी खुद के कर खुद को ढुंडता खुद के घर छूटा घर देह पराया छूटा संसार छूटा साया अपने घर में मैं पराया....... ll अपने घर में मैं पराया डर डर के भरता किराया किस्मत उजली भागा डर आकांक्षाओं के कट गये पर दिवारे गिरी सिमिओ कीं छत भी गिरा अपेक्षाओ का इच्छा कीं खिडकी फुट गयी इटे कामना कीं डेह गयी मिट्टी मिट्टी में मिल गयी बेसहारा मुझ लोहे को परिसस्पर्शी स्वर्णआभा मिल गयी भाग्य सें गुरुकृपा मिल गयी..... ll अपने घर में मैं पराया रह रहा भर के किराया सुखं दुःख भाव भावना क्रोध मोह विकार ने गिराया दुःखियारा मैं कर्ज में डुबा भर भर के किराया पराये घर का पराया आंगन छूटा सुखं दुःख का आंगन फल सब्जी आलू टमाटर बैंगन सूखा संसार का सारा बगीचा हट गये आवरण मिथ्या सारे वस्त्र धोती गमचा कट गया संसार का परचा अपने घर में मैं पराया रहता था भर भर किराया..... ll अपने घर में मैं पराया देह उपाधीयों सें घिरा मिटा नाम उपाधी प्रतिष्ठा परलोक कीं सारी पराकाष्ठा ज्ञान निर्गुण परमात्मा में निष्ठा मुरझाया संसार वासना का मल सिकुड गये कर्मो के फल पापपुण्य का धुल का गया मल सुखं दुःख हुवे हाल बेहाल मिल गया अब कष्टो का हल अपने घर में मैं पराया कर्ज को मिटाकर साक्षी बल.... ll अपने घर में मैं पराया चेंतना साक्षीभाव का सहारा अपने घर में मैं पराया कल का मैं आज बदला मैं अब मैं न रहा अकर्ता बन देख रहा जीवन खेल का साक्षी बना खुद का जीवन देख रहा अज्ञानमयी खुद हि मिटा पुराने जीव का अस्तित्व हटा अब ना कोई सहारा रहा मिथ्या मैं अहं झूटा झूटे रिश्ते टूटे बंधन छूटा किनारा सारा पुराना पुराना मैं मुझसें हारा अपने घर में मैं पराया..... ll अपने घर में मैं पराया रह रहा जीवन भर किराया मुझ में अब मैं न रहा क्यूँ लगता सब को बेसहारा अब दू मैं सबको सहारा विश्वकल्याण हेतू श्रीकृष्ण करे इशारा विश्वगुरु बन बरसी गुरुकृपा मार्गदर्शक अर्जुन का सारथी बना भटके अज्ञानी जनोका सहारा गीता केवल ग्रंथ ना रहा प्रश्नो के उत्तर दुःख का उतारा जीवनयज्ञ में देता निवारा हारे दुःखीयारों का सहारा.... ll अपने घर में मैं पराया नया जीवन हारा पुराना चमत्कार अद्भुत यह गुरुकृपा मैं नया, जीवन का उद्देश नया गुरुकृपा सें जीवन बदला अपने घर में मैं पराया रहता था भर के किराया ईश्वर सें है अब प्रार्थना स्वीकार सेवा का किराया जीवन उद्देश को मिले सार्थकता.... ll