Wise Words
अहम् का वेहेम् ️सत्य केवंल ब्रह्मन् ️
निशिगंधा क्षीरसागर
अहम् तो है -- केवल वेहेम् जो ढक लेता -- सहज स्वयम् आवश्यक है -- जीने के लिये अज्ञानी जीव -- का जीवन प्रगती के मार्गपर -- बने अडचन् अहम् है -- मात्र वेहेम् अज्ञान के बादल -- गहन गहन बादल सें घिर -- गनन गनन यही जीव का -- सत्य कथन प्रश्न उठाये -- जीव मन मनन कैसा यह अस्तित्व? -- मेरा चेतन चिंतन सें निकला -- प्रश्न खुद के जेहेन क्यूँ कहा कब -- कोsहम् कोsहम् ? .....ll 1 ll परमात्मा धीरे सें -- सूक्ष्म करे कथन प्यारे हम है -- एक सोहsम् सोsहम् धरती सें -- आकाश का मिलन श्वास नि:श्वास सें -- जुडे है हमदम तेरा मेरा रिश्ता -- हरपल हरदम अहंवृत्ती सें हुवा -- अलगता का भरम् अहम् सें भरा --- विकारो का मकान जीव मुकाम हुवा --- अज्ञान का गुलाम देह रिश्ते नाते -- दृश्य नश्वर मान चहूऔर है घिरा --- माया का अज्ञान फसता हि गया --- जीव जनम् जनम् अंधकार में खोया --- आतम् स्वरूप स्वयम् विस्मृती किचड में -- फसा अज्ञान कानन नित्य सदा है --- द्रष्टा साक्षी आत्मन् अनुभवों का द्रष्टा -- सदा स्वयंभू स्वमग्न ज्ञान खडग सें -- कर अज्ञान हनन ज्ञान कीं होली --- अविद्या का हवन धुवा हटाकर दिखा -- अग्नि का तपन् बादल हटतें हि --- प्रकाशित हुवा गगन् व्यष्टी समष्टी अंदर -- बाहर आत्मन् ब्रह्मन् एक है दोनों --- दूर कर वेहम् मैं हि तू -- कर ले मनन हटा जेहेन सें -- तेरा झुटा वेहेम् अहम् है मिथ्या --- केवल सोहsम् सोsहम् ....ll 2 ll छोटा बादल जैसे -- ढकता सारा गनन अज्ञान हटा दे -- पढकर ज्ञान विज्ञान जो नजदिक है -- वही बना जीवन आकाश स्थित सूर्य -- उजाला नित्य प्रकाश अहम् कीं खुंटी -- अज्ञान बंधन पाश तोड बंधन सिमितता -- स्वार्थी बुद्धी अहम् समय स्थान सें -- परे आदी अंतहीन अहंकार मिटाकर बन -- आकाश हि आकाश सर्वव्यापी सदा सर्वत्र -- प्रकाश हि प्रकाश मिथ्या रुपरंग आकार -- झुटा बादल अहम् नित्य निराकार निर्गुण -- जैसे आकाश परदा अनुभव चित्र बादलाकार -- उभरा है वेहम् सत्य नित्य प्रकाशित -- हटा मिथ्या अहम् अहंकार मिथ्याकार जीव -- फसा लिप्त क्रोधकाम हटाकर अब मिथ्या -- अहम् का वेहम् स्वरूप कीं प्राप्ती -- होकर विकार विहीन वापस लौट स्वsधाम -- परमात्मा के परमधाम .....ll 3ll राम कर्ता - मैं अकर्ता - काहे का अहम् ? छोड कर्मफल - गुरुचरणो में - जाकर शरण कैसी चिंता ? अब तो आया - मन बिश्राम चित्त को - आराम आया - राम में बिराम अनुभव लेना- बना संकल्प - तेरा करम् यही केवल - है बस्स - तेरा जुरम् शून्यता बना संकल्प -- हटा अहम् का भरम् तोड बंधन सारे -- भावना रिश्ते करम् जीवपन छूट जाय -- अब जनम् मरन् मानवता सें मुक्ती पाना -- यही तेरा धरम् उन्नत सारे संकल्प -- मुक्ती का मनन हार जा लौकिकता -- वैभव तन मन लौकिकता त्याग -- कर मन का दमन अज्ञान कूडा त्यागदे -- सिखाता मनुष्य जनम् संकल्प सें सिद्धी -- जीव सें शिवम् साधक बन चढ -- जा गुरुशिखर चरम् सूक्ष्म अहम् सें -- कारण बना जनम् कल्याण इसी में -- त्याग यह अहम् मनुष्य जीवन लांघना -- छोडकर मिथ्या अहम् विवेक बुद्धीसें कर -- अहम् का परीक्षण झुटा वेहेम् -- झुटा अहम् -- जानले आत्मन् अन्य प्राणियों सें -- बेहतर है मानव बुद्धी विवेक और -- तर्क के कारण जगन् मिथ्या है -- सत्य केवल ब्रह्मन् सत्यपित कर ले -- यह महावाक्य महन् दिखलादे दुनिया को -- सार्थक मानव जनम् स्थित होकर जी ले -- स्वयंभू स्वरूप ब्रह्मन्.....ll 4ll
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