ज्ञानाक्षर
अस्तित्व का आश्चर्य !!!
निशिगंधा क्षीरसागर
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दिखनेवाला आभास है --- देखनेवाला सत्य है l देखनेवाला दिखता नहीं -- जो अस्तित्व का तत्व है l जो जान पडता नहीं -- बडे आश्चर्य की बात है l दिखाई देता रूप है --- स्वरूप उसका अरूप है l भूत सारे उसीसे है --- सबसे वह अलिप्त है l सारी अवस्थाये उसीमे है -- वह सदा अनवस्थ है l सारे काल उसीमे है -- वह महांकाल कालातीत हैl शब्द नाम उसीसे है -- किंतु वह शब्दातीत है l जो शब्दो स्थानो से --- और कालो से परे है l पर अपर लोको में -- वही सर्वत्र गया हुवा है l गया हुवा सभी जगह -- वह कही भी नहीं है l विविध रंग सृष्टी में --- प्रकृती लेकिन उसीसे है l बडे आश्चर्य की बात है -- वह रंगरूप विहीन है l त्रिगुण प्रकृती माया की -- वह गुणातीत मायापती है l कार्य कारण कर्म उसीसे --- कर्ते हुवे जो अकर्ता है l ऐसा निर्गुण नि:संग निर्लीप्त --- वही तत्व अस्तित्व है l असार अज्ञान हटा के -- जो बचा शुद्ध अहं है l शुद्ध त्वम शुद्ध अहं और -- अस्तित्व की एकता है l जहाँ नाम रूप रंग नही --- अव्यक्त अज्ञेय स्वरूपता है l जहाँ द्वैत भेद खंड नही --- अभेद अखंड अज्ञेयता है l जानने लायक अस्तित्व में -- अज्ञात साक्षी चेतना है l जानने लायक सार वही -- जो जानने में आता नहीं l जो जानने में आता नहीं -- मेरा सर्वव्यापी स्वरूप है l कितना उसे बया करे -- शब्द बुद्धी की मर्यादा है l बडे आश्चर्य की बात है -- सब में उसकी एकता है l बडे आश्चर्य की बात है -- सब में उसकी एकता है l ====(())=====