Wise Words
सवाल कर --- खुद सें
निशिगंधा क्षीरसागर
सवाल खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन शब्द सें परे --- तू केवल मौन तू न चित्त न -- इंद्रिया न मन तू न बुद्धी न ---अहंकार न तन तू है तत्व तू --- द्रष्टा तू शून्य सबकुछ तूहि तू -- सत् चिद् आनंद नि:संदेह तू परमात्मा --- तू परम आनंद तू हि अजर -- अमर अविनाशी तत्व स्थान समय सीमा -- वस्तू पदार्थ सें परे शब्द सें परे --- तू केवल मौन तू हि आत्मन् -- तू हि मौन सवाल कर खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन........... II1 II सवाल खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन तुम्ही सें माया -- माया सें जीवन साधन है केवल -- यह मानवी तन जीवन सें विकास -- ईश्वर का प्रयोजन स्वरूप को खोजती -- आत्मा कीं गुंज खंडित हुई एकता -- बना अब दुजा अखंड अद्वय ब्रह्मा -- तन मन बटा ज्ञान कीं खुदाई -- खुद को खोजा कर्ता कर्म क्रियापद -- त्रिपुटी कीं तीज अज्ञान अविद्या विषय -- विकार कें बीज बीज सें अंकुरित --- बढा जीवन वृक्ष फैला अश्वत्थ वृक्ष --- असल में कल्पवृक्ष बन जाए जीव--- ज्ञान का बोधीवृक्ष मूल जिसका निर्गुण -- निराकार ऊर्ध्व आंतरिक्ष जितना उपर उतना -- नीचे बढता वृक्ष मूल आधार धरातल -- मूल है अंतरिक्ष मुलाधार सें सहस्त्रार --- धीरे घटता विकास अज्ञाने सें ज्ञान --- कर अब प्रयास ज्ञान सें पायेगा -- खुद को विनासायास सवाल खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन ........... II2II सवाल खुद सें -- तू है कौन...? खुद कें प्रश्न -- खुद सें पूछ बाहर माया वहा -- न मिले कुछ तुझं में हि -- सारे मिलेतें उत्तर शांत मन सें -- मौन में उत्तर तू हि आत्मन् -- तू हि मौन कहा खोजता यहा -- वहा माया मन तुझं में छिपा -- संसार का कारण अज्ञान कें संस्कार -- आवरण को पहचान जो दिखे वह -- तू नही है मान दृष्य नश्वर -- अदृश्य तत्व सत जान सवाल खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन ........... II3II सवाल खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन तुम हि स्वप्न -- स्वप्न हि जीवन तुम हो सत -- जीवन असत सत असत का -- अनुठा मिश्रण सत तत्व को -- मिथ्या कें दर्शन स्वप्न द्रष्टा तुम --- अनुभव असत कैसे होगा खुद --का स्वरूप दर्शन जीवन हि बनता -- प्रश्नो का मार्गदर्शक प्रश्न मालिका बना -- जीवन सामने खडा असफलता अपयश अज्ञान -- कीं चोट खाया संकट कठीनाई माया -- कीं केवल परीक्षा वजुद कीं अनोठी --- प्रतियोगिता में दौडा इच्छा अपेक्षा यश -- कें पीछे भागा प्रश्नो कें हल -- माया में खोजा अज्ञानी दृष्टी सें -- मात्र भटकन बना संकट प्रश्नो सें --- क्या तूनें सिखा ? कर्तापन भोक्तापन सें -- करम को ठोया हरेक चोट नें --- तुझे है तराशा लगी ठेस अहंकार को --- चकनाचूर कराया मेरे बंदे सामान्य नही -- तू है हिरा गिरता उठता रख -- हौसला उठकर संभलता तू नही कोई --- अज्ञानी साधारण जीव गुरुवचन श्रद्धा रख -- अनुभवो कीं सिख तू हि आत्मन् --- तू है शिव खुद को क्यूँ -- समझे अज्ञानी जीव सवाल खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन........... II4II सवाल खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन मैं अमृत -- मेरा तू -- अमृत पुत्र तू है विशेष --- परमात्मा का पुत्र मृत नहि तू -- अजन्मा अविनाशी अमृत्व दूर कर दुःख -- दृष्य दिशा द्वंद्व निर्विकार निर्विचार निर्विषय -- मन शांत निश्चल मन मानस सरोवर-- आईना बना हृद्जल मैं चैतन्य बिंब --- तुझमे मेरा प्रतिबिंब जैसा तेरा पिंड -- वैसा तेरा ब्रह्माण्ड देहरूपी कुंड में -- पानी मती भिन्न मुझ सागर में -- तू केवल बूँद मुझ सागर मैं --- तू कैसे अंतवंत तू लेहेर मात्र -- तू तरंग मात्र तोड दे सीमा स्थान -- तू सदा सर्वत्र काल सें परे --- समय सें तू न बद्ध भूत भविष्य वर्तमान -- सबकुछ मुझ में मैं हूं आत्मन् -- मैं हूं ब्रह्मन् मुझ अनादी अंनत -- अपार सागर मैं तू बुंद तरंग -- तू मेरा पुत्र भीड में खोया -- रिश्ते नातो का साया जागते हुए सोया -- स्वरूप को खोया अज्ञान हटाकर देख -- ज्ञान कीं दृष्टीं द्वैत हटाकर अद्वैत है -- व्यष्टी समष्टी बुंद सागर में -- मिलतेहि सागर बनती दो नही दो कीं -- एकता अद्वय पृष्ठभूमी एकता कीं दृष्टी में -- एकत्व सृष्टी सब कुछ एक -- ज्ञान कीं दृष्टी ........... II5II सवाल खुद सें -- तू है कौन...? तू हि आत्मन् -- तू हि मौन तुझं में --मुझ में -- द्वैत कहा ? मैं हूं आत्मन् -- मैं हि ब्रह्मन् तू भी आत्मन् -- मैं भी आत्मन् मैं हि ब्रह्मन् - तू भी ब्रह्मन् मुझ में तू -- तुझं में मैं तू हि आत्मन् -- तू हि मौन नेती नेती सें -- खुद को जान तू हि आत्मन् -- तू हि मौन तू और मैं -- दो नही केवल एक ........... II6II
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