ज्ञानाक्षर
वो व्यक्ति कहाँ है?
स्वप्रकाश
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वो व्यक्ति कहाँ है, वो व्यक्ति कहाँ है। कोई तो मुझे बतलाए, उसे ढूंढकर मेरे सामने लाये ।। १ नाम परिजन जाति देश, समाज ने थोपी सारी पहचान । शरीर, रूप, लिंग, मन, सभी में मैं देखूं अपनी पहचान ।। जन्म से लेकर मृत्यु तक, इस तन को पल पल संवारा। स्वयं को देह समझकर, दर दर भटका मैं आवारा ।। वो व्यक्ति कहाँ है, वो व्यक्ति कहाँ है। कोई तो मुझे बतलाए, उसे ढूंढकर मेरे सामने लाये ।। २ भोग विलास की वृत्ति ने, मुझे माया में रखा लिप्त। मृत्यु तक भी ना जान पाया, मैं ही हूँ अस्तित्व ।। समाज परिजन जगत सब, देते गए अज्ञान। इस देह को ही सत्य समझ कर, व्यवहार करता रहा मैं नादान ।। खुद को देह समझ कर, मैं स्वयं ही भोगा जाऊँ। इस जगत के हर एक रिश्ते में, सभी से धोखा खाऊँ ।। वो व्यक्ति कहाँ है, वो व्यक्ति कहाँ है। कोई तो मुझे बतलाए, उसे ढूंढकर मेरे सामने लाये ।। ३ एक दिन गुरु कृपा हुई, जागे मेरे सोये भाग। आत्मज्ञान के प्रकाश से, शून्य हो गया अहंभाव ।। जिस देह को मैंने अपनी समझा, वो तो पल पल बदले रूप। मनोशरीर, स्मृति और अहम सभी निकले मिथ्या रूप ।। जिसको मैंने मैं कहा, वो व्यक्ति ही निकला मिथ्या रूप। आत्मज्ञान से मैंने जाना, मेरा सत्य स्वरुप ।। वो व्यक्ति कहाँ है, वो व्यक्ति कहाँ है। कोई तो मुझे बतलाए, उसे ढूंढकर मेरे सामने लाये ।। ४ जागृति, स्वप्न, सुषुप्ति, सब विश्व चित्त की लीला है। अनेक रूपों में किरदार निभाता, मैं साक्षी ही अकेला हूँ ।। मैं कोई शरीर नहीं, मैं तो इस शरीर का दृष्टा हूँ । मैं कोई मन नहीं, मैं इस मन का अनुभवकर्ता हूँ ।। सभी अवस्थाएँ अनुभव हैं, मैं इन सभी का तत्व हूँ। मैं कोई व्यक्ति नही, मैं तो सम्पूर्ण अस्तित्व हूँ ।। वो व्यक्ति कहाँ है, वो व्यक्ति कहाँ है। कोई तो मुझे बतलाए, उसे ढूंढकर मेरे सामने लाये ।। ५ <font color="green">**सभी सुखी हों, सभी समृद्ध हों, सभी ज्ञानवान हों, सभी सत्य जानें ........**</font> <font color="green">**श्री गुरवे नमः ....ॐ शांति शांति शांति .....**</font> <font color="blue">***आभार: मैं परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री तरुण प्रधान जी एवं गुरुक्षेत्र का उनकी शिक्षाओं एवं मार्गदर्शन के लिए आभारी हूँ।***</font> संपर्क सूत्र.. साधक की कलम से : स्वप्रकाश....... ईमेल: swaprakash.gyan@gmail.com