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चेतना की कठिन समस्या Hard Problem Of Consciousness
कणिका
<br><br><div class='ui image'><img width='1200px' src='images/18047910-ChatGPT Image May 7, 2026, 09_53_35 PM.png'></div><br><br> चेतना की कठिन समस्या का अर्थ है: > **हमारे भीतर अनुभव होने का कारण क्या है?** अर्थात् * लाल रंग केवल दिखाई ही क्यों नहीं देता, उसका लालपन भीतर महसूस भी क्यों होता है? * पीड़ा केवल शरीर की प्रतिक्रिया क्यों नहीं है, वह दुख के रूप में अनुभव क्यों होती है? * हम केवल शरीर और मस्तिष्क का ढाँचा न होकर भीतर से जागरूक क्यों हैं? --- # सरल समस्याएँ और कठिन समस्या ## सरल समस्याएँ विज्ञान इन बातों का अध्ययन कर सकता है * मस्तिष्क कैसे देखता है * स्मृति कैसे बनती है * निर्णय कैसे होते हैं * भाषा कैसे समझी जाती है * ध्यान कैसे कार्य करता है इन सबका संबंध मस्तिष्क की क्रियाओं से है। --- ## कठिन समस्या सबसे गहरा प्रश्न यह है: > यदि मस्तिष्क की हर क्रिया को पूरी तरह समझ लिया जाए, > तब भी अनुभव उत्पन्न क्यों होता है? उदाहरण के लिए एक यंत्र यह पहचान सकता है कि सामने लाल रंग है। परंतु क्या उसे लाल रंग का अनुभव होता है? मनुष्य को होता है। यही भीतर का अनुभव चेतना कहलाता है। --- # अनुभूति क्या है? अनुभूति अर्थात् भीतर का प्रत्यक्ष एहसास। जैसे * आम का स्वाद * संगीत का आनंद * प्रेम का अनुभव * दुःख की पीड़ा * मैं हूँ की अनुभूति --- # दार्शनिक कल्पना कल्पना कीजिए एक ऐसे मनुष्य की * जो बोलता है * हँसता है * चलता-फिरता है * सब कुछ सामान्य करता है परंतु उसके भीतर कोई अनुभव नहीं है। वह केवल बाहरी क्रियाएँ कर रहा है। तब प्रश्न उठता है > क्या चेतना केवल शरीर की क्रियाओं से अधिक कुछ है? --- # विभिन्न मत ## भौतिकवाद इस मत के अनुसार > चेतना मस्तिष्क से उत्पन्न होती है। --- ## द्वैतवाद इस मत के अनुसार > मन और पदार्थ दो अलग तत्त्व हैं। --- ## अद्वैत वेदान्त Ashtavakra Gita तथा Adi Shankaracharya की परंपरा कहती है > चेतना मस्तिष्क से उत्पन्न नहीं होती, > बल्कि सम्पूर्ण जगत चेतना में प्रकट होता है। अर्थात् भौतिक दृष्टि: > मस्तिष्क से चेतना उत्पन्न होती है। अद्वैत दृष्टि: > चेतना के भीतर मस्तिष्क और संसार का अनुभव होता है। --- # यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है? क्योंकि यह प्रश्न जुड़ा है * आत्मा से * जीवन से * स्वतंत्र इच्छा से * कृत्रिम बुद्धिमत्ता से * मैं कौन हूँ? जैसे मूल प्रश्नों से --- # क्या इसका उत्तर मिल गया है? नहीं। आज तक इसका सर्वमान्य उत्तर नहीं मिला है। कुछ लोग मानते हैं कि भविष्य में विज्ञान इसे समझ लेगा। कुछ मानते हैं कि चेतना स्वयं अस्तित्व का मूल रहस्य है। और अद्वैत परंपरा कहती है > चेतना को किसी वस्तु की तरह नहीं जाना जा सकता, > क्योंकि वही हर ज्ञान और अनुभव का आधार है।
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