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प्रार्थना और याचना
शैल
प्रार्थना, धन्यवाद है, समर्पण है, स्वीकार है!! अहोभाव की अभिव्यक्ति है हृदय की आर् त पुकार है। अनुगूंज है एक बूंद के सागर हो जाने का एक लहर का सागर से एक हो जाने के एहसास का संगीत है, जो बह रहा है, शुद्ध प्रेम रूप में हर ओर प्रार्थना अस्तित्व के असीम प्रेम का प्रसाद है सीमाओं का टूटना और शून्यता में विलय है शून्य से सूक्ष्म तर और अस्तित्व से विराट हो जाने का अनुनाद है। जब एक नाद का दूसरे में विलय होता है तब ध्वनि होती है। एक की जीत और एक की हार होती है एक का मिटना और दूसरे के अहम का थोड़ा और विस्तार होता है। किंतु जब वही नाद महाशून्य में विलीन होता है तो स्वयं से मिलन होता है। और तब रह जाता है केवल मौन! उस मौन में प्रेम निर्बाध बहता है प्रार्थना बन कर शब्दों में नहीं भावों में गीत और संगीत बन कर याचना शुद्ध मन से कर रहे हाथ जोड़ कर याचना आत्म ज्ञान सभी को हो चेतना सबकी बढ़े और काम क्रोध से मुक्त हों सेवा का संकल्प लेकर मनसा वाचा कर्मणा करते हैं हम प्रार्थना अज्ञान का अंधेरा मिटे और बुद्धि शुद्धि सबकी हो ज्ञान का प्रकाश उतरे जन्म सार्थक हो सभी का सबको मिले प्रारब्ध अपना शांति और आनंद हो हर एक के जीवन में प्रेम का प्रसाद उतरे बंधनों से मुक्त होकर प्रगति पथ पर सब बढ़ें समृद्धि को उपलब्ध हों सब करते हैं तेरी वंदना। शुद्ध मन से कर रहे हाथ जोडकर याचना
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