Wise Words
गुरुकृपा
निरांजन
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कुछ अबोधता और कुछ अज्ञानता हैं, फिर भी गुरुदेव ने हमको स्वीकार, यहीं उनकी कृपालुता, यहीं उनकी महानता हैं ॥१॥ सारे अनुभव जग के झूठे हैं ऐसा अपरोक्ष अनुभव और तर्क से जानना है, सत्य तो केवल अनुभवकर्ता, उसी भाव को लाना है ॥२॥ माया एक जाल हैं, जिसका रूप बड़ा विक्राल है, यदि बना साक्षीभाव दृढ़, तो न माया है, न जाल है ॥३॥ बहुत कुछ पाया माया में, फिर भी रहा सदैव अभाव, अगर हैं पूर्णता पाने की चाह , तो लाना पड़ेगा साक्षीभाव ॥४॥ स्वयं का तत्व अनुभवकर्ता, बस उसी भाव में होना है, माया चाहे जिस रूप में आए, वो तो बस एक खिलौना है ॥५॥ शब्दों में कह पाना क्या दिया इस मार्ग ने, ये संभव ना हो पायेगा, फिर भी कह दूं मिला एक नया जीवन, तब भी ये अतिशयोक्ति ना कहलाएगा ॥६॥ जीवन-पथ पर न आए कोई विघ्न, यदि गुरुदेव वाणी पर हो सतत मनन ॥७॥ कौन हूँ मैं, क्या है साक्षीभाव और क्या है माया, इन सब प्रश्नों का उत्तर मैंने, गुरु-कृपा से पाया ॥८॥ पूजनीय गुरुदेव की कृपा