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नैया किनारा करें (कविता)
जानकी
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नैया किनारा करें <img src="https://images.pexels.com/photos/1072842/pexels-photo-1072842.jpeg?auto=compress&cs=tinysrgb&w=1260&h=750&dpr=1" alt="Full Width" style="height:350px;width:350px"> प्रमाणित विधि का अमूल्य रचना ज्ञानमार्ग का ये विधान। सेवा तन्मय ज्ञान ख़ातिर सदा प्रधान करुणानिधान्॥ हर् वाक्य गूढ़ अर्थ वेद सरि का धारा प्रबाह कला। वृष्टि प्रेमिल ज्ञान, कोमल बचन, शीतल सुमधुर गला॥ सम्पूर्ण गुरुक्षेत्र है पटल में इन को चुना क्षेत्र ने। प्रज्ञा दीपक शीर में सरस्वती, निश्वार्थ प्रेम नेत्र में॥ प्रक्षेपित सभा प्रत्यक्ष मुनि से जो बोधिवार्ता मिला। सत्य प्रकट सामने जगत का मिथ्या धरोहर हिला॥ प्राणी मार्ग विहीन थी भ्रमित थी, मार्ग, गुरू जो मिले। खोजी पूर्ण हुआ हटा दुःख पीड़ा, आनन्द के गुल खिले॥ ख़ाली अंजलि प्यास आश बूँद को सागर् खींचा भर दिया। बेचैनी मन व्यग्र था, मलिन था, ज्ञानाग्नि ने हर दिया॥ उन्हीं के पदमार्ग में अविचलित् चलना सदा साथ में। जो लक्ष्य गुरु का अनुशरण हो उन्मुक्ति के आश में॥ दूसरा जन्म दिये बने जनक वो पैदा हुईं जानकी। मेरा जीवन धन्य जो गुरु मिले तरुण प्रधान जी॥ अध्यात्म पथ आप के निकट में है फूलके रास्ते। पंछी घोंसल छोड़ के गुम न हो उड़ान के वास्ते॥ बन्ना है फूल पद्म, पारसमणि कृपा करुणा भरें। थामा जीवन मुक्ति हेतु कृपया नैया किनारा करें।। *** आभार : बोधिवार्ता कार्यक्रम, सद्गुरु श्री तरुण प्रधान जी