Wise Words
ओ रंगिले ओ रंगरेज....रंगरेज रे!!!
निशिगंधा क्षीरसागर
ओ रंगिले ओ रंगरेज....रंगरेज रे!!! रंग सारे प्यारे प्यारे रंग सुंदर न्यारे न्यारे रंग वफा कें प्रेम भरोसे गले मिले या गिले शिकवे धोखा फरेबी कुछ काले काले रंग सारे तुझ में समाहित ओ रंगरेज..... रंगरेज रे !!! रंग में रंगी जमी तारे रंगीन मिझाझ आकर्षक नजारे नजारे जैसे कुछ होते नही आसमान कें आकार सारे बादल सी कोई वस्तू नही दृश्य दिखते होते नही भ्रममात्र बादल दृश्य दिखते दृष्टी का छलावा मात्र सारे रंगहीन दुनिया को रंग देते कैसी यह करनी 'तेरी झूठ को रंगीन दिखलाती ओ रंगिले ओ रंगरेज.....रंगरेज रे !!! रूप रंग मोह कें सहारे भ्रम माया जगत कें किनारे ममता अहं अभिमान पिलाकें नशे में बेहोष सें होश सारे एक भूल पडी माया में बेहकें अज्ञान में जीव रमे सारे सपने को सच मान बैठे कैसी तेरी लीला न्यारी ओ रंगिले ओ रंगरेज.....रंगरेज रे !!! भले हि चढे रंग मुझ पर.... इनमे सें कोई रंग मैं नही आईने में खुद को देखता प्रतिबिंब मैं कभी भी नही सप्तरंगी रंगो कीं फुहार इंद्रधनू कितने सुंदर दृष्य सुंदर नजारे इनमे सें कोई दृष्य मैं नही दृष्य छाया मुझे दिखती दिखलानेवाला वास्तव में मैं नही रंगो सें घिरी सारी दिशा जहाँ देखू दृष्यमें फसा समता कीं दृष्टी तू दिखा सारे रंग में तू छिपा सबसें न्यारा अलिप्त द्रष्टा तू ही मुझ में छिपा मुझ में कोई रंग नही मुझ में कोई दृष्टी नही समता कें रंग मैं रंगी मैं तुझ में रंग चली रंगहीन हो ओ रंगिले कैसी लीला तेरी चले ओ रंगिले ओ रंगरेज.....रंगरेज रे !!! जितने रंग उतने भेश जितने भेश उतने देश रंग रूप भेश देश सब होकर मुझ मे ही न्यारा सब का द्रष्टा मैं रंगहीन होकर ओ रंगिले रंग का दुसरा पेहलू छिपाते रंगहीन आरपार कुछ रंग-बेरंग कही कुरूप कही सुंदर दृष्य कही दृष्य साफ कही अदृश्य रंग का अभाव इन्ही में छिपा दृष्य अभाव भी साफ दिखा रंग दृष्य भ्रम आने जाने आना जाना मुझ में नही सारे पेहलू मुझ में हि लेकिन मैं तो कुछ भी नही मैं सदा सें नित्य निरंतर मैं निराकार निरंजन निर्गुण ओ रंगिले रंगरेज ओ रंगरेज... रे....!!! रंगींली तेरी दुनिया मैं रंगहीन हो मैं तू हो चला गुण रूप लिंग सें परे गुणहीन हो मैं निर्गुण बना आकार कें भ्रम को जानता चला रूप हटाकर मैं तू बन चला तुझमें समाना जीवन कीं सार्थकता कैसे यह अघटीत घटा ?? तेरी कृपा ही गुरुकृपा कृपावश सारे रंग में रंगा लेकिन सब सें विलग अछुतां रंगहीन पारदर्शी खुद को जाना सब में होकर भी अब कहा ? मुझमें "मैं" बाकी? ओ रंगरेज तेरा मेरा अच्छा बुरा अब तो सारा रंग उतरा ओ रंगिले ओ रंगिले ओ रंगरेज.....रंगरेज रे !!!
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