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ज्ञानमार्ग में कोई साधना क्यों नहीं है?
अजय कुमार त्रिपाठी
ज्ञानमार्ग में मूलज्ञान होता है अर्थात मूलतत्व का ज्ञान होता है, ज्ञान आवश्यक का ज्ञान मात्र है अर्थात जो अनावश्यक है उसे हटाकर तत्व तक पहुंचा जाता है । अब जरा आपके मूलतत्व जो की अस्तित्व का भी मूलतत्व है उसपर दृष्टी डालें, हां अनुभवकर्ता की बात हो रही है यहां अब यदि आत्मज्ञान यह कहता है कि मैं ही अनुभवकर्ता हूं जो निर्गुण है क्या वह साक्षीभाव या समाधी या ध्यान की किसी अवस्था या सूक्ष्म अवस्था आदि में रहना चाहता है, क्या अनुभवकर्ता इन अवस्थाओं में रहना चाहता है?? कौन सी साधना करना चाहता है अनुभवकर्ता ? यदि आप ही वह हैं तो खुद विचार करें कि यह कौन है जो साधना करना चाहता है या कोई अवस्था प्राप्त करना चाहता है ?? हां अब आप समझ गये होंगें अहमभाव है यह । यदि आप पुरुष हैं तो आपको पुरुष होने के लिए क्या करना पड़ता है?? उसी प्रकार आप अनुभवकर्ता हैं (तत्व हैं ) यह बनने के लिए क्या करना पडेगा?? जवाब आसान है की अज्ञान छोड़ना पड़ेगा अपना की मैं कुछ और हूं ।। इसलिए ज्ञानमार्ग में अज्ञान का नाश पर्याप्त है और उसके बाद कोई साधना नहीं है क्योंकी अज्ञान नष्ट होते ही आप मूल स्वरूप में आ जाते हैं ।। आशा है यह लेख आप सभी साधकों के काम आएगा।। मेरी शुभकामनाएं आप सभी के साथ हैं मार्ग पर चलते रहें
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