ज्ञानाक्षर
अद्वैत ज्ञान: सरलतम एवं सीधा ज्ञान।
सत्यम
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अद्वैत किसी "स्मृति के ज्ञान" के विषय में नहीं है। - यह अभी जो है। उसके विषय में है। अभी जब अस्तित्व (साक्षी) अपने ही मिथ्या रूपों (अनुभव) का द्रष्टा है। यह उसके विषय में है। - यह जटिलता के विषय में नहीं, सरलतम के विषय में है। - यह मौलिकता के विषय में है। - यह उसके विषय में है जो सीधे सामने है। - वास्तव में यह कोई ज्ञान नहीं है यह तो अस्तित्व होना है। - यह तर्क-वितर्क, सिद्धांत, धारणा आदि के विषय में नहीं, यह केवल और केवल शुद्ध अनुभव के विषय में है। - यह कोई नई वस्तु धारण करना या खोजना नहीं है। यह उस बारे में है जो सदा से विद्यमान है। ___ इतना आसान है तो सबको दिखाई क्यों नहीं देता? यदि सबसे सरल है तो इतना प्रयास क्यों करना पड़ता है? जिसने जितना अज्ञान इकट्ठा कर रखा है उसे उतना ही समय और प्रयास देना पड़ता है। यह समय और प्रयास उसके लिए नहीं है जो स्वरूप सदा विद्यमान हैं, यह सब प्रयास उसके त्याग के लिए है जिसके कारण उस सरलतम पर ध्यान नहीं जाता। जो जितनी मजबूत पकड़ से अपनी मान्यताओं और अहंकार को पकड़े है छुपाए हुए है उसको उतना ही समय लगता है। वरना अभी सबकुछ है। अभी अज्ञान छोड़ दो तो अभी दिखाई देगा। ___ धन्यवाद। गुरु एवं गुरुक्षेत्र की कृपा सबपर बनी रहे।