Wise Words
बस, मैं हूँ
सुविद्या
Like This Article
बस, मैं हूँ मैं अनुभवकर्ता हूँ, मैं अनुभव हूँ, मैं दोनों हूँ--मैं कौन हूँ? मैं सब कुछ हूँ और कुछ भी नहीं, बस, मैं हूँ। मैं शून्यता हूँ, शांति, प्रेम और आनंद हूँ, कुछ भी नहीं, सब कुछ है, और सब कुछ में कुछ भी नहीं है, फिर भी, कुछ भी नहीं सब कुछ है। संतुष्ट और तृप्त, पर कौन तृप्त है? तृप्त होने वाला भी नहीं है, बस होना, सदा वर्तमान में रहना। न कोई नाम देना, न कोई अर्थ, न उसे देखने का प्रयास, न उसे समझने की कोशिश, न कुछ करने का प्रयास, न कुछ न करने का प्रयास-- बस, वह निष्प्रयास प्रयास। वही अस्तित्व, वही शेष रह जाना-- मैं हूँ। वह शून्य ही पूर्ण है, वह शून्यता ही मैं हूँ। मैं शून्य हूँ, फिर भी शून्य नहीं हूँ, मैं प्रेम और आनंद की अपार पूर्णता से भरा हूँ। अब मुझे कोई भय नहीं है, मैं कर्ता नहीं हूँ, मैं भोक्ता नहीं हूँ, मैं इस अनंत लीला का केवल साक्षी हूँ। यह मेरी ही लीला है, और फिर भी मैं इससे अछूता हूँ। मैं शुद्ध हूँ, निर्मल हूँ ,स्वतंत्र हूँ। ऐसा नहीं कि मैं अब मुक्त हुआ हूँ, मैं तो सदा से ही मुक्त था। ज्ञान के उदय से सभी मान्यताएँ बिखर गईं। अज्ञान की भूमिका भी मैं स्वयं ही खेल रही था। इन सभी भ्रमों को जानकर मैंने अपने उस सत्य को पहचान लिया, जो अपरिवर्तनीय है, जो सदा से है, और सदा रहेगा। धन्यवाद गुरूक्षेत्र, धन्यवाद गुरुदेव, अनंत कृतज्ञता, अनंत तृप्ति। शांति, शांति, शांति।