Wise Words
इन्द्रियसंयम
राजमल जाट
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इन्द्रियसंयम विकासक्रम में सहायक है सप्ताह में एक बार इसे अवश्य पालन करना चाहिए। **इन्द्रियसंयम** - वाणी, नेत्र, शारीरिक क्रियाएं। ***१. वाणी*** - सप्ताह में एक बार अवश्य मौन व्रत का पालन करना चाहिए। मौन व्रत से यह तात्पर्य है कि अनावश्यक बाते, हंसी -मजाक से बचना है। जैसे आपके मन में कोई बात आ रही है और आप उसे दूसरों को बताना चाहते है लेकिन अगर वह आवश्यक नहीं है तो उसे कल के लिए छोड़ दीजिए। इस दिन आप जो भी आवश्यक वार्ता करना चाहते है उसे सरल और कम से कम शब्दों में कहने का प्रयास करिए। **२. नेत्र** - हम अक्सर किसी कार्य को करते समय अनावश्यक आस - पास के दृश्यों को बहुत देखते है , इससे कार्य की गति मन्द होती है और मन भटक जाता है। यदि हम बुरे दृश्य को देखते है तो उस दृश्य से आने वाला नकारात्मक नाद हमारी आंखों के माध्यम से चित्त में उतर जाता है। अगर ,अच्छा दृश्य देखते है तो उसका प्रभाव भी चित्त पर ही पड़ता है। इन्द्रियसंयम के दिन अपने नेत्रों को अपने वश में रखना चाहिए। **३. शारीरिकरिक क्रियाएं/हाव -भाव**** - यदि आप अपने रोज़मर्रा के कार्य को जल्दी -२ करते है और कुछ भूलते भी रहते है तो इस दिन आप उन कार्यों को अपने अनुसार आराम से कर सकते है जिनकी कोई समय सीमा नहीं है और आप अकेले ही कर रहे है। इससे कार्य की गुणवत्ता बढ़ती है और उसमें गलतियां नहीं होती है।**