Wise Words
जीवन और नदिया
अखंडिता
बहना उसकी इच्छा नहीं है बहना उसका स्वभाव है स्वभाव में जीना ही उसका आनंद है ... वह सतत बह रही है स्वतः बह रही है... सभी तटबंध तोड़ आवेग के साथ घोर गर्जना करती वह नदी बस बह रही है! उफन रही, नहीं पता उसे कि आगे क्या है बाधायें हैं ? गांव है बसा कोई ? या शहरी रास्ते हैं ? कोई बांध है या समंदर की बाहें हैं पसरी हुई ? वह सोचती नहीं कुछ भी बस बहती चली जाती है.... क्योंकि वह अपने स्वभाव में जी रही है रुक कर देखती नहीं कि लक्ष्य क्या है जाना कहां है उद्देश्य क्या है ? पता है उसको कि यह यात्रा ही उसकी मंजिल है हिरनी जैसी कुलांचे भरती झूले जैसी पेंग मारती नव यौवना नदिया बस बही चली जा रही... छोड़ दिया है स्वयं को समर्पित है अंतर्निहित शक्ति के प्रति बिन सोचे, बिन समझे उफनती गरजती वह बारिश की भावनाओं से लबालब स्वाभाविक नदी , तटबंधों को तोड़ती बही चली जा रही बहती जा रही है आनंद मगन अविरल प्रतिपल निरंतर......
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