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मानदंड: वर्गीकरण का आधार।
सत्यम
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मानदंड क्या होते हैं? मानदंड वे "आधार" है जिनके बल पर अनुभवों का कोई भी वर्गीकरण किया जा सकता है। जैसे सुन्दर और कुरूप का वर्गीकरण, सत्य और असत्य का वर्गीकरण, ज्ञान और अज्ञान का वर्गीकरण, अच्छे और बुरे का वर्गीकरण, नैतिक और अनैतिक का वर्गीकरण आदि आदि। ___ मानदंड तय करने/बनाने का कारण क्या है? मानदंड निर्धारित कर लेने से अनुभवों का वर्गीकरण करने में मदद मिलती है। वर्गीकरण एक प्रकार का ज्ञान ही होता है। वर्गीकरण के लिए प्रयोग किए गए मानदंड जीवन को आसान बनाते हैं, क्योंकि यदि आपके मानदंड प्रामाणिक एवं विश्वशनीय है तब हर बार आप वही मानदंड लगाकर अनुभवों को वर्गों में विभाजित कर सकते हैं। जिससे ज्ञान लेना बहुत ही सरल हो जाता है और हम जानते हैं कि ज्ञान जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है। ___ मानदंड कैसे बनाए जाते हैं? मानदंड बनाने के लिए बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता है। क्योंकि जैसे आपके मानदंड होंगे वैसा ही वर्गीकरण होगा और वैसा ही ज्ञान होगा। यदि आपके मानदंड उचित एवं प्रायोगिक है तो ही आपको उचित ज्ञान होगा अन्यथा आपको अज्ञान ही होगा। इसीलिए मानदंडों को बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का ख्याल रखना आवश्यक है:- १. उद्देश्य की पूर्ति करे: कोई भी मानदंड बनाने से पहले अपना वर्गीकरण का उद्देश्य आपको पता होना चाहिए कि आप इस मानदंड से क्या परिणाम अपेक्षित रखते हैं जैसे यह मानदंड ऐसा हो कि सत्य को सत्य बताए और असत्य को असत्य। २. हर बार सही वर्गीकरण दे: जो मानदंड हर बार स्थिति अनुसार पूर्णतया सही जानकारी दे। वही सही मानदंड होना चाहिए। ३. ज्ञान को स्पष्टता दे: यह मानदंड कभी भी वर्गों में मिलावट न करें। कि कोई अनुभव इस वर्ग में भी आ रहा है और दूसरे वर्ग में भी आ रहा है। ४. मानदंड प्रामाणिक होने चाहिए: उस मानदंड को लागू करके देखना चाहिए (अपरोक्ष अनुभव), क्या यह हर बार उचित वर्गीकरण बनाता है? क्या यह तार्किक है(तर्क)? ___ मानदंड कब और कहां बनाए जाते हैं? जब किन्हीं अनुभव आदि को किसी वर्गीकरण में बांटने की आवश्यकता होती है तब हमें कुछ "आधार" चाहिए होते हैं जिन पर आधारित हम उन अनुभवों को वर्गीकृत कर सके। जिससे उनका और उन्नत ज्ञान संभव हो सके। ___ मानदंडों की कुछ मुख्य विशेषताएं: ___ १. मानदंड व्यक्तिनिष्ठ होते हैं। सभी अपने मानदंड रखने के लिए स्वतंत्र हैं। परन्तु अक्सर देखा जाता है कि समाज दूसरों पर अपने मानदंड थोप देता है। जिसके कारण लगभग ९० % लोगों के मानदंड रूढ़ियां आदि होते हैं। हर कोई अपने मानदंड बना सकता है। और यदि आपने ध्यान दिया हो कुछ चुनिंदा लोग अपने मानदंड समाज से थोड़े अलग रखते हैं। जिनका दृष्टिकोण चीजों को लेकर समाज से अलग पाया जाता है। ये लोग अक्सर नयापन चाहते हैं। ये रूढ़ियों को स्वीकार नहीं करते। और यही लोग समाज में कुछ अलग कर पाते हैं जैसे: कोई शोध, कोई प्रयोग, कोई क्रांति आदि। २. मानदंड बदलने पर परिणाम बदल जाते हैं। जैसे: यदि सुंदर और असुंदर का वर्गीकरण के लिए कोई मानदंड बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए: १)मानदंड उदाहरण एक: "जो देखने में सुंदर है केवल वह ही सुंदर है।" सुंदर: सभी सुंदर दिखाई देने वाले फल, फूल, बाग बगीचे, सभी केवल सुंदर दिखने वाले लोग, दृश्य, अनुभव आदि। असुंदर: जो भी सुन्दर "दिखाई" नहीं देता। बुरे दिखने वाले फल सब्जियां, सुंदर न दिखने वाले मनुष्य आदि। २) मानदंड उदाहरण दो: "जो व्यक्ति के काम आए वही सुंदर है।" सुंदर: सभी प्रकार के पौष्टिक भोजन, वे सभी पशु पक्षी जो मनुष्य के लिए किसी न किसी प्रकार से लाभकारी है। प्रकृति का केवल उतना भाग जो व्यक्ति के अनुकूल है और किसी न किसी प्रकार से उसके काम आ सकता है। असुंदर: जो व्यक्ति के लिए किसी भी प्रकार से लाभकारी नहीं है। सभी दूसरी आकाशगंगाए, सभी हिंसक पशु पक्षी, सभी प्राकृतिक आपदाएं, स्वयं मनुष्य जो एक दूसरे का बुरा चाहते है। ३) मानदंड उदाहरण तीन: "जो भी प्राकृतिक है होना आवश्यक है वही सुंदर है।" सुंदर: सबकुछ ही सुंदर है क्योंकि यहां जो कुछ भी हो रहा है उसका होना आवश्यक है। असुंदर: कुछ भी असुंदर नहीं है। यहां तक कि असुंदर और सुंदर के मानदंड बनाना भी सुंदर है क्योंकि यही आवश्यक है। और यही हो रहा है। ३. सभी मानदंड सही ज्ञान नहीं देते: यदि कोई मानदंड प्रायोगिक नहीं है, ऐसे ही कुछ भी काल्पनिक मानदंड बना दिया जाए तो वह मानदंड आपको अज्ञान ही देंगे। इसीलिए सभी मानदंडों को आँख बंद करके मान नहीं लेना है। जब भी आप कोई भी वर्गीकरण देखे तो उसका मानदंड जानने का प्रयास करें और उसको जांचें कि क्या यह तार्किक है तभी उस वर्गीकरण से आए ज्ञान को ग्रहण करें। ___ निष्कर्ष: इस प्रकार पूरा का पूरा वर्गीकरण एवं उसका ज्ञान मानदंडों पर आधारित है। जैसे मानदंड होंगे वैसे ही वर्गीकरण होगा। और वैसा ही ज्ञान होगा। इसीलिए मानदंड हमेशा एक वृहद दृष्टिकोण से, अपने उद्देश्य के अनुसार, अपरोक्ष अनुभव और तर्क पर आधारित होने चाहिए। जिससे ज्ञान ही हो अज्ञान न हो। ___ धन्यवाद। गुरुक्षेत्र सब पर कृपा करें।