जीवन


परिभाषा

  • जीवन विश्वचित्त का वह अखंड, सार्वभौमिक और अनादि-अनंत प्रवाह है जो चेतना की विभिन्न परतों में स्वतः को अभिव्यक्त करता है।
  • जीवन एक अखंड अनुभव की नदी है, जिसमें जीव तो आते-जाते हैं (नश्वर हैं) किंतु जीवन कभी समाप्त नहीं होता।

मुख्य शिक्षाएं

  • जीवन का कोई सांसारिक या बाह्य लक्ष्य या उपयोग नहीं होता; जीवन का एकमात्र प्रयोजन स्वयं जीवन का ही विविध रूपों में अनुभव प्रदान करना है।
  • अस्तित्व में कुछ भी मृत नहीं है; जिसे हम पत्थर, मिट्टी या जड़ पदार्थ कहते हैं, वे भी विश्वचित्त के अंतर्गत जीवन की ही अत्यंत धीमी अभिव्यक्तियाँ हैं।
  • मनुष्य जीवन संपूर्ण जीवन की एक अत्यंत सीमित और संकीर्ण अभिव्यक्ति है, जो शरीर और इंद्रियों के बंधनों के कारण संकुचित प्रतीत होती है।
  • मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य सांसारिक भोग नहीं, बल्कि अज्ञान से मुक्त होकर आत्मज्ञान प्राप्त करना और इस जन्म-मृत्यु के चक्र से परम मुक्ति पाना है।
  • जीवनमुक्त वह दुर्लभ साधक है जो देह के रहते हुए भी इस जीवन की नश्वरता को जानकर अद्वैत आनंद में स्थित रहता है।

देखें


Edit This Article History