परिभाषा
- उत्तरजीविता किसी भी जीव की वह मूल और सबसे शक्तिशाली वृत्ति है जो उसे भौतिक संसार में स्वयं को जीवित और सुरक्षित बनाए रखने के लिए निरंतर प्रेरित करती है।
- यह जीव के संपूर्ण व्यवहार, शारीरिक प्रणालियों और मानसिक वृत्तियों की आधारशिला है।
वृत्तियाँ
उत्तरजीविता की वृत्ति तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है:
- रक्षण (शत्रु और खतरों से रक्षा),
- भक्षण (ऊर्जा ग्रहण करना और बढ़ाना), और
- प्रजनन (अपनी प्रतिकृति बनाना)।
मुख्य शिक्षाएं
- जीव की समस्त इंद्रियों की रचना और चित्त की परतें इसी प्रकार विकसित हुई हैं ताकि जीव केवल उतना ही और वैसा ही अनुभव प्राप्त करे जो उसकी उत्तरजीविता के लिए उपयोगी हो।
- अहम् (मैं-पन की भावना) वास्तव में उत्तरजीविता के लिए उपयोगी एक यंत्र है, जिसके बिना जीव अपने शरीर की रक्षा और पोषण नहीं कर सकता।
- ज्ञानमार्ग के अनुसार, उत्तरजीविता को ही सत्य का अंतिम मानदंड मान लेना अज्ञान और मृत्यु का भय है। भौतिकवादी सोच को पार करके ही साधक वास्तविक मुक्ति को प्राप्त कर सकता है।
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