परिभाषा
- सकारात्मक ज्ञान वह ज्ञान है जो किसी वस्तु, विषय या अनुभव के गुणों का वर्णन सकारात्मक (स्वीकारात्मक) रूप में करता है; जैसे 'यह वस्तु लोहे की बनी है' या 'यह शरीर सुंदर है'।
- इसमें अनुभवों और उनके गुणों को यथार्थ रूप में स्वीकार किया जाता है।
मुख्य शिक्षाएं
- ज्ञानमार्ग पर सकारात्मक ज्ञान अधिक उपयोगी नहीं माना जाता; क्योंकि हमारा मूल अज्ञान अक्सर सकारात्मक ज्ञान ('मैं शरीर हूँ' या 'मैं मन हूँ') के रूप में ही पाया जाता है।
- सत्य, अनुभवकर्ता या अस्तित्व को सकारात्मक शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास करते ही वह इंद्रियों की सीमा में आकारबद्ध हो जाता है, जिससे अज्ञान बढ़ता है। जैसे ही ब्रह्म के विषय में कोई सकारात्मक बात रखी जाती है, वह गलत हो जाती है।
- अज्ञान के नाश के लिए केवल नकारात्मक ज्ञान (जैसे नेति-नेति) ही सबसे प्रभावी साधन है जो भ्रामक आवरणों को हटाता है।
- यद्यपि व्यावहारिक जगत और विज्ञान में सकारात्मक ज्ञान उपयोगी है, परंतु तत्व ज्ञान के स्तर पर नकारात्मक ज्ञान के द्वारा शून्य और अज्ञेयता का बोध होने पर ही परम जागृति आती है।