परिभाषा
- परम वह सर्वोच्च, अखंड, निरपेक्ष और अंतिम स्थिति या सत्ता है जिससे परे कोई अन्य आयाम, सत्य, धरातल या ज्ञान संभव नहीं है।
- ज्ञानमार्ग पर केवल अनुभवकर्ता (या स्वयं) ही एकमात्र अचल और परम सत्य है।
मुख्य शिक्षाएं
- सांसारिक और व्यावहारिक जीवन में जिसे सत्य माना जाता है वह केवल विसत्य (सापेक्षिक सत्य) है, जबकि परम सत्य केवल वही है जो सदैव अपरिवर्तनीय रहता है।
- चूंकि संपूर्ण दृश्य ब्रह्मांड और उसके अनुभव परिवर्तनशील हैं, इसलिए वे असत्य हैं। इन सभी असत्यों को प्रकाशित करने वाला साक्षी (अनुभवकर्ता) ही परम सत्य है।
- परम सत्ता (ब्रह्म या परब्रह्म) हमारी संकीर्ण बुद्धि और भाषा की सीमाओं से सर्वथा परे है, इसलिए अज्ञेयता और मौन ही इसकी अंतिम व्याख्या है।
- परम लक्ष्य की प्राप्ति का अर्थ है— अहंकार का पूर्ण नाश और जीव के द्वंद्वों का सदा के लिए शांत हो जाना, जिसे मुक्ति या निर्वाण कहते हैं।