परिभाषा
- प्रमाण (या साक्ष्य) ज्ञान प्राप्त करने के वे पर्याप्त, विश्वसनीय और अकाट्य साधन हैं जो किसी भी सत्य की पुष्टि करते हैं।
- जो प्रमाणित नहीं है वह सब कुछ अज्ञान, भ्रामक मान्यता, कल्पना और अंधविश्वास की श्रेणी में आता है।
मुख्य शिक्षाएं
- ज्ञानमार्ग पर केवल दो ही प्रमाण सर्वमान्य हैं: अपरोक्ष अनुभव (प्रत्यक्ष दर्शन) और ठोस तर्क (सत्यापित अनुमान)।
- अपरोक्ष अनुभव सबसे विश्वसनीय प्रमाण है, जो वर्तमान में इंद्रियों या चेतना द्वारा सीधे अनुभव किया जाता है।
- तर्क दूसरा मुख्य प्रमाण है जो अपरोक्ष अनुभवों के बीच तार्किक, सुंदर और सुसंगत संबंध स्थापित करता है।
- पारंपरिक रूप से माने जाने वाले अन्य साधनों (जैसे उपमा, अनुपलब्धि, अर्थापत्ति या केवल शास्त्रों के शब्द) को ज्ञानमार्ग पर स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जाता; उनका सत्यापन अनिवार्य है।
- अनुभवकर्ता एकमात्र ऐसी परम सत्ता है जो स्वतः सिद्ध और स्वप्रमाणित है; उसका खंडन करने का प्रयास ही उसके होने को प्रमाणित कर देता है।