मनुष्य


परिभाषा

  • मनुष्य चेतना और विकासक्रम के उस विशिष्ट स्तर पर विद्यमान एक भौतिक-मानसिक संरचना है जो विवेक, प्रज्ञा और उत्कृष्ट बुद्धि से संपन्न है।
  • ज्ञानमार्ग के अनुसार, मनुष्य स्वयं अनुभवकर्ता नहीं है, बल्कि वह चेतना के पटल पर दिखने वाला अनुभव का ही एक अत्यंत परिष्कृत रूप है।

मुख्य शिक्षाएं

  • मनुष्य योनि पशुवृत्ति से ऊपर उठकर आत्म-विचार और सत्य का अनुसंधान करने में सक्षम है, इसलिए इसे आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत दुर्लभ माना गया है।
  • मनुष्य का संपूर्ण शरीर और उसकी इंद्रियों का प्रपंच उत्तरजीविता के लिए विकसित हुआ है, किंतु मनुष्य की विशेषता यह है कि वह इस जैविक सीमा को लांघकर अपने सत्य स्वरूप को जान सकता है।
  • मनुष्य जीवन का सर्वोच्च और एकमात्र वास्तविक लक्ष्य मनुष्य देह के बंधनों (अज्ञान) से मुक्ति प्राप्त करना है।
  • आत्मज्ञान होने पर व्यक्ति की मनुष्यता भी विलीन हो जाती है और दिव्यता का उदय होता है, जहाँ वह स्वयं को संपूर्ण अस्तित्व के रूप में पहचान लेता है।

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