परिभाषा
- विवेक बुद्धि की वह सर्वोच्च और शुद्धतम क्षमता है जो सही-गलत, सत्य-असत्य, नित्य-अनित्य और आत्मा-अनात्मा के बीच स्पष्ट भेद करने में समर्थ होती है।
- यह ज्ञानमार्ग का सबसे अनिवार्य और मूलभूत उपकरण है।
मुख्य शिक्षाएं
- विवेक के द्वारा ही साधक यह जान पाता है कि जो भी अनुभव (दृश्य) है वह मैं नहीं हूँ, और मैं केवल अनुभवकर्ता (दृष्टा) हूँ। इसे दृश्य-दृष्टा विवेक कहा जाता है।
- विवेकी बुद्धि किसी भी मत, परंपरा, अंधविश्वास या सामाजिक मतारोपण को बिना प्रमाण के स्वीकार नहीं करती; वह सदैव अपरोक्ष अनुभव और प्रमाण पर टिकती है।
- विवेक का उदय होने से ही चित्त में वैराग्य (अनासक्ति) का जन्म होता है; क्योंकि साधक यह स्पष्ट देख लेता है कि अनित्य वस्तुओं में कोई स्थायी सुख नहीं है।
- चित्त की शुद्धि और गंभीर मनन के द्वारा ही विवेक को जागृत और तीक्ष्ण किया जाता है, जो अंततः जीव को दुखों से मुक्त कर जीवनमुक्ति की ओर ले जाता है।