सत्य


परिभाषा

  • सत्य अनुभवों का वह वर्गीकरण है जो अटल मानदंडों पर आधारित होता है।

मुख्य शिक्षाएं

  • संपूर्ण दृश्य ब्रह्मांड, शरीर और मन के अनुभव निरंतर परिवर्तनशील होने के कारण असत्य (मिथ्या या माया) हैं। केवल अचल और नित्य रहने वाला अनुभवकर्ता (साक्षी) ही परम सत्य है।
  • व्यावहारिक सत्य (विसत्य) वह सापेक्ष सत्य है जो व्यवहार और उत्तरजीविता में काम आता है - जैसे जगत की वस्तुएं, जो बदलती हैं पर व्यवहार में वास्तविक मानी जाती हैं।
  • सत्य की विशेषता यह है कि वह अत्यंत सरल और स्वतः सिद्ध होता है, उसे याद नहीं रखना पड़ता; जबकि असत्य (झूठ) अत्यंत जटिल होता है। सत्य को अपरोक्ष अनुभव और तर्क से जाना जाता है, अंधविश्वास से नहीं।

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