परिभाषा
- सहज समाधि अस्तित्व या अद्वैत की वह सबसे सरल, स्वाभाविक और अंतिम अवस्था है जो आत्मज्ञान के बाद स्वतः ही बिना किसी कृत्रिम प्रयास के सदा बनी रहती है।
- यह चित्त के परे की वह स्थिति है जहाँ केवल 'होना मात्र' ही शेष रहता है।
मुख्य शिक्षाएं
- सहज समाधि में चित्त की वृत्तियाँ और विचार उठते और मिटते रहते हैं, परंतु अनुभवकर्ता अपने सत्य स्वरूप में सदा स्थिर और सर्वथा अविचलित रहता है।
- यह अवस्था कुछ नया करने, जानने या ध्यान लगाने से नहीं आती, क्योंकि यह हमारे भीतर पहले से ही विद्यमान है; केवल अज्ञान का आवरण हटने पर इसका स्वतः भान होता है।
- संसार में रहते हुए भी बिना किसी आसक्ति या बंधन के कर्म करना और प्रत्येक क्षण को पूर्णता व शून्यता में जीना ही सहज समाधि है।
- इसे ही जीवनमुक्ति कहा जाता है, जहाँ साधक का अलग 'व्यक्ति' होने का अहंकार (अहंनाश) पूरी तरह विलीन हो जाता है।