चित्त


परिभाषा

  • अर्धस्थायी स्मृति की एक परतीय रचना ।
  • ज्ञानमार्ग पर चित्त ही ज्ञान प्राप्त करने और अनुभवों को संसाधित करने का एकमात्र अंतिम उपकरण है।

मुख्य शिक्षाएं

  • चित्त कोई ठोस भौतिक वस्तु नहीं है, बल्कि यह निरंतर होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों और वृत्तियों का एक गतिशील प्रवाह (चित्तशक्ति) है।
  • सभी अनुभव (जगत, शरीर और मन) अंततः चित्त के ही अनुभव हैं क्योंकि बाह्य इंद्रियां केवल अनुभवों को छाने का कार्य करती हैं, जिनका अंतिम प्रसंस्करण चित्त में ही होता है।
  • साधक के लिए चित्त की विभिन्न परतों का अध्ययन आवश्यक है ताकि वह चित्त के साथ स्वयं के भ्रामक तादात्म्य को तोड़ सके। चित्तशुद्धि के द्वारा ही सत्य का उदय और मुक्ति संभव होती है।

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