सौंदर्यशास्त्र


परिभाषा

  • सौंदर्यशास्त्र चित्त द्वारा गढ़ी गई सुंदरता, समरूपता, आकर्षण और कलात्मक रस की प्रकृति का दार्शनिक अध्ययन है।
  • ज्ञानमार्ग के अनुसार, सौंदर्यशास्त्र का विषय पूरी तरह से व्यक्तिनिष्ठ है।

मुख्य शिक्षाएं

  • सुंदरता वह अनुभव है जो चित्त को अपनी ओर आकर्षित करता है; यह वास्तव में उच्च संगठन और कम एन्ट्रापी का संकेतक है।
  • जब चित्त किसी रचना में पूर्ण समरूपता और निश्चित नियम देखता है, तो वह प्रसन्न होता है; इसी अनुभव को हम 'सुंदरता' कहते हैं।
  • सुंदरता के दो स्तर होते हैं: १. सार्वभौमिक सुंदरता (जो समरूपता के नियमों पर टिकी है और सबको सुंदर लगती है, जैसे फूल या प्रकृति), और २. व्यक्तिनिष्ठ सुंदरता (जो व्यक्तिगत संस्कारों, अनुकूलन और वासनाओं से रंगी होती है)।
  • चूंकि सुंदरता और कुरूपता चित्त द्वारा आरोपित भ्रामक श्रेणियां हैं, इसलिए वे असत्य (माया) का हिस्सा हैं। अनुभवकर्ता इन दोनों द्वंद्वों से परे अखंड सत्य और पूर्ण है।

देखें


Edit This Article History