स्थान परिकल्पना है जो अनुभवकर्ता के पटल पर प्रतीत होता है ।
मुख्य शिक्षाएं
- अनुभवकर्ता का कोई भौतिक स्थान नहीं - देश उसके अंदर है, वह देश के अंदर नहीं।
- वह सर्वव्यापी है - सभी अनुभव, सभी स्थान, सभी लोक उसी में हैं।
- शरीर में अनुभवकर्ता सीमित नहीं - शरीर अनुभवकर्ता के अंदर प्रकट होता है।
- अनुभवकर्ता अविभाज्य है - वह एक है, अनेक नहीं।