अस्तित्व पूर्णतः प्रक्रियाहीन और निष्क्रिय है। यह किसी भी क्रियात्मक परिवर्तन या निर्माण विधि के अधीन नहीं है।
मुख्य शिक्षाएं
- सभी प्रक्रियाएं (जैसे विकासक्रम, रासायनिक क्रियाएं आदि) अस्तित्व के भीतर घटित होने वाले अनुभव मात्र हैं; अस्तित्व स्वयं किसी प्रक्रिया से नहीं गुजरता।
- अस्तित्व की उत्पत्ति की कोई विधि या प्रक्रिया नहीं हो सकती, क्योंकि उस प्रक्रिया को होने के लिए भी अस्तित्व का पहले से मौजूद होना अनिवार्य है।
- अस्तित्व पूरी तरह से निष्क्रिय और निर्विकार है; इसमें परिवर्तन की केवल संभावना मात्र होती है, जो मिथ्या रूप में प्रकट होती है।
- सृष्टि, स्थिति और लय जैसी प्रक्रियाएं केवल चित्त द्वारा कल्पित की गई सीमाएं हैं।
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