अस्तित्व अखंड रूप से केवल एक ही है। अस्तित्व की अनेक संख्याएं होना असंभव है।
मुख्य शिक्षाएं
- अस्तित्व का अर्थ ही संपूर्णता है, और दो या दो से अधिक संपूर्णताएं होना तार्किक रूप से असंभव है।
- अनेक अस्तित्वों का आभास केवल अज्ञान और मानसिक कल्पना के कारण होता है; परमार्थ में सब कुछ मिलकर एक ही सत्ता है।
- एक ही अस्तित्व विभिन्न नाम-रूपों और अनुभवों के माध्यम से अनेक रूपों में प्रकट होता है, जो केवल मायावी तरंगों की भांति हैं।
- अस्तित्व का स्वभाव अद्वैत है, जो समस्त विभाजनों और संख्यात्मक गणनाओं से परे है।
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