परिभाषा
- आवृत्ति नाद (दो अवस्थाओं में होने वाले चक्रीय परिवर्तन) की वह गति या दर है जो यह दर्शाती है कि एक समय की इकाई में वह परिवर्तन कितनी बार स्वयं को दोहराता है।
- ज्ञानमार्ग के नाद प्रतिरूप (मॉडल) के अनुसार, आवृत्ति और मात्रा ही तरंगों की विविधता निर्धारित करती हैं।
मुख्य शिक्षाएं
- अस्तित्व में मूल संभावनाएँ नाद के रूप में प्रकट होती हैं, और इस नाद की आवृत्ति शून्य से लेकर अनंत तक कुछ भी हो सकती है।
- विभिन्न आकृतियों और विभिन्न आवृत्तियों के परस्पर मिश्रण से ही इस संपूर्ण ब्रह्मांड और उसकी समस्त जटिल नादरचनाओं का निर्माण होता है।
- हमारी इंद्रियां भी नाद की विशिष्ट आवृत्तियों के प्रति ही प्रतिक्रिया करती हैं; जैसे आँखें प्रकाश की आवृत्ति को रंग रूप में और कान ध्वनि की आवृत्ति को स्वर के रूप में ग्रहण करते हैं।
- चित्त में वृत्तियों और विचारों के रूप में चलने वाली प्रक्रियाएं भी नाद ही हैं, जिनकी अत्यधिक तीव्र आवृत्ति के कारण वे इंद्रियों की बाह्य पहुँच के पार (अभौतिक) प्रतीत होती हैं।